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Wednesday, February 18, 2026
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दक्षिण कोरिया मार्शल लॉ मामला, पूर्व मंत्री से पुलिस ने की पूछताछ!

तत्कालीन राष्ट्रपति यून की आलोचना करने वाले कई मीडिया आउटलेट्स की बिजली और पानी की आपूर्ति काटने के लिए राष्ट्रीय अग्निशमन एजेंसी को निर्देश दिया था।

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दक्षिण कोरिया के पूर्व आंतरिक और सुरक्षा मंत्री ली सांग-मिन से पुलिस ने शुक्रवार को रातभर पूछताछ की। उनसे मार्शल लॉ लागू करने की योजना में शामिल होने के आरोपों को लेकर सवाल – जवाब किए गए। ये मामला पिछले साल के अंत में उस समय का है, जब पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल ने थोड़े समय के लिए मार्शल लॉ लगाया था। पूछताछ के बाद ली सांग-मिन शनिवार को अपने घर लोट गए।

पूर्व मंत्री शुक्रवार को दोपहर करीब 2 बजे विशेष पुलिस जांच दल के सामने संदिग्ध के तौर पर पेश हुए। उन्हें करीब 18 घंटे बाद शनिवार को सुबह करीब 7:40 बजे रिहा कर दिया गया।

मिन पर शक है कि उन्होंने 3 दिसंबर को मार्शल लॉ की घोषणा के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति यून की आलोचना करने वाले कई मीडिया आउटलेट्स की बिजली और पानी की आपूर्ति काटने के लिए राष्ट्रीय अग्निशमन एजेंसी को निर्देश दिया था।

ली ने कथित तौर पर अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया। बताया जाता है कि उन्होंने सुबह 4 बजे से तीन घंटे से अधिक समय अपने बयान के आधिकारिक रिकॉर्ड की समीक्षा और संशोधन में बिताया।

योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, जांचकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बिजली पानी की आपूर्वित काटने का का आदेश तत्कालीन राष्ट्रपति यून ने दिया और ली ने उस पर अमल किया।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की गवाही, फरवरी में सोल और सेजोंग में ली के घर और दफ्तरों पर की गई छापेमारी के दौरान जब्त की गई सामग्री का फोरेंसिक विश्लेषण भी शामिल है।

बता दें राष्ट्रपति यून ने 03 दिसंबर की रात को दक्षिण कोरिया में आपातकालीन मार्शल लॉ की घोषणा की, लेकिन संसद द्वारा इसके खिलाफ मतदान किए जाने के बाद इसे निरस्त कर दिया गया। मार्शल लॉ कुछ घंटों के लिए ही लागू रहा लेकिन इसने देश की राजनीति को हिला कर रख दिया।

नेशनल असेंबली ने राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। यून के महाभियोग का मामला संवैधानिक न्यायालय में गया। न्यायालय ने महाभियोग को जारी रखा जिसके बाद यून को पद छोड़ना पड़ा।

महाभियोग के अलावा, यून को अभी भी अपने मार्शल लॉ के आदेश से संबंधित विद्रोह के आरोपों पर आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है।

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