प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद खेल महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन देश की खेल प्रतिभाओं को निखारने और खेल भावना को बढ़ावा देने के लिए एक शानदार मंच है। उन्होंने कहा कि खेल केवल जीत-हार तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह अनुशासन, टीमवर्क, आत्मविश्वास और नेतृत्व जैसे गुणों का विकास करते हैं, जो राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि संसद खेल महोत्सव का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों, युवाओं और समाज के हर वर्ग को खेलों से जोड़ना है। जब नीति निर्माण से जुड़े लोग स्वयं खेल मैदान में उतरते हैं, तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। उन्होंने “फिट इंडिया” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त भारत की नींव होते हैं।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत में खेलों के लिए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार खेलो इंडिया, टॉप्स योजना और नए खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से खिलाड़ियों को हरसंभव समर्थन दे रही है। ओलंपिक, एशियाई खेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की हालिया सफलताएं इस बदलते खेल परिवेश का प्रमाण हैं।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि खेल महोत्सव जैसे आयोजन प्रतिभाओं की पहचान करने के साथ-साथ आपसी भाईचारे और सौहार्द को भी मजबूत करते हैं। संसद खेल महोत्सव में विभिन्न दलों के सांसदों का एक साथ खेल गतिविधियों में भाग लेना लोकतंत्र की जीवंतता को दर्शाता है। यह आयोजन राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में एकजुटता का संदेश देता है।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि हार और जीत खेल का हिस्सा हैं, लेकिन खेल भावना हमेशा सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को खेलों के लिए प्रोत्साहित करें और इसे करियर के रूप में अपनाने में सहयोग करें।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी का संबोधन संसद खेल महोत्सव को एक प्रेरणादायी पहल के रूप में स्थापित करता है। यह आयोजन न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच देता है, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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