पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग ने सामान्य पर्यवेक्षकों के साथ-साथ पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों के दैनिक कार्यों पर नजर रखने हेतु नई प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।पश्चिम बंगाल में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व और सीधे नियंत्रण में एक विशेष निगरानी कक्ष स्थापित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, यह कक्ष न केवल आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों के कामकाज पर नजर रखेगा, बल्कि अपने निरीक्षण के आधार पर रोजाना रिपोर्ट नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय को भेजेगा।
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के लिए पहले ही कुल 294 सामान्य पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। इस तरह, चुनाव वाले चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में पश्चिम बंगाल ऐसा एकमात्र राज्य बन गया है, जहां प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक सामान्य पर्यवेक्षक तैनात किया गया है। इसके अलावा, इस चुनाव में 84 पुलिस पर्यवेक्षक भी शामिल होंगे, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में 100 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे, जो चुनावी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।
चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के लिए आयोग ने अब पर्यवेक्षकों के दैनिक कामकाज को भी निगरानी के दायरे में लाने का फैसला किया है। यह पहल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा इस महीने की शुरुआत में दिए गए स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसामुक्त चुनाव के आश्वासन के अनुरूप है।
इस बीच, आयोग ने पश्चिम बंगाल लोक निर्माण विभाग (PWD) की सचिव अंतरा आचार्य और राज्य के खाद्य प्रसंस्करण सचिव परवेज अहमद सिद्दीकी को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है। इससे पहले, पश्चिम बंगाल के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को तमिलनाडु के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। हालांकि, अंतरा आचार्य और परवेज अहमद सिद्दीकी ने अन्य राज्यों में अपनी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
यह भी पढ़ें:
ईरान के मिसाइल ठिकानों पर अमेरिका का ‘बंकर बस्टर’ हमला
सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा: आसाम में कांग्रेस को बड़ा झटका
