सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊ की एक अदालत में चल रहे मानहानि मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। यह मामला उनके द्वारा भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर मीडिया में दिए गए बयान से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा,“आपको कैसे पता चला कि 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय भूमि पर कब्जा हुआ है? क्या आप खुद वहां थे? आपके पास कोई विश्वसनीय प्रमाण है? अगर आप सच्चे भारतीय होते तो ऐसी बातें नहीं करते।”
जस्टिस दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने राहुल गांधी से यह भी सवाल किया कि उन्होंने संसद के बजाय सोशल मीडिया पर इस तरह के बयान क्यों दिए। कोर्ट ने कहा,“आप जो भी कहना चाहते हैं, संसद में कहिए। ये संसद के मुद्दे हैं, सोशल मीडिया के नहीं।”
राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ए.एम. सिंघवी और वकील प्रसन्न एस. ने कहा कि उनके मुवक्किल के बयान जनहित में सूचना उजागर करने के उद्देश्य से थे। उन्होंने दलील दी कि, “एक सच्चा भारतीय यह भी कहेगा कि हमारे सैनिकों की पिटाई हुई…” राहुल गांधी के वकीलों ने याचिका में दावा किया गया है कि देशभर में उनके खिलाफ 20 से अधिक मुकदमे चल रहे हैं, जो एक कानूनी उत्पीड़न का पैटर्न दिखाते हैं। याचिका में कहा गया,“यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है, ताकि एक प्रमुख विपक्षी नेता को सरकार की आलोचना से रोका जा सके।”
बता दें की, राहुल गांधी के ऐसे बयानों से भारतीय सेना की प्रतिमा को सचमुच क्षति पहुंची है। इससे पहले भी राहुल गांधी के बयानों को पाकिस्तानी DG ISPR के प्रोपोगेंडा के तौर पर प्रोत्साहित किया गया है।
यह मामला एक सेवानिवृत्त बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) अधिकारी उदय शंकर श्रीवास्तव ने अगस्त 2023 में लखनऊ की एक अदालत में दर्ज कराया था। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने भारतीय सेना और उनकी खुद की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है। शिकायत के मुताबिक, यह बयान 16 दिसंबर 2022 को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिया गया था। श्रीवास्तव के अनुसार, यह बयान न केवल भारतीय सेना को बदनाम करता है बल्कि समाज में राष्ट्रविरोधी भावना को भी बढ़ावा देता है।
राहुल गांधी ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता सेना का हिस्सा नहीं हैं और सीधे तौर पर इस बयान से प्रभावित नहीं हुए हैं, इसलिए उनकी शिकायत कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए थी। राहुल गांधी के वकीलों ने कहा,“मानहानि का मामला वही दर्ज कर सकता है जो खुद इससे आहत हो। यह शिकायत केवल अखबार की कटिंग और अफवाहों पर आधारित है, जो कानूनन प्रमाण के रूप में मान्य नहीं हैं।”
फरवरी 2025 में लखनऊ की मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। मई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता श्रीवास्तव को नोटिस जारी किया है। शिकायतकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया पेश हुए, जो पहले से कोर्ट में उपस्थिति दर्ज करा चुके थे। तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
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