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तमिलनाडु कांग्रेस ‘विनाश के रास्ते’ पर, आंतरिक कलह से पार्टी को भारी नुकसान

कोंग्रस सांसद एस. जोतिमणि की चेतावनी

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तमिलनाडु कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी कलह को लेकर पार्टी की लोकसभा सांसद एस. जोतिमणि ने शुक्रवार (2 जनवरी)को तीखी नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य इकाई के कुछ नेता स्वार्थ से प्रेरित होकर काम कर रहे हैं, जिससे पार्टी धीरे-धीरे “विनाश के रास्ते” पर बढ़ रही है। जोतिमणि ने कहा कि यह स्थिति पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए बेहद पीड़ादायक है और यह कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीति की मूल भावना के विपरीत है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक विस्तृत पोस्ट में जोतिमणि ने बिना किसी नेता का नाम लिए तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि पार्टी की दिशा राहुल गांधी की निस्वार्थ, सिद्धांतवादी और निर्भीक राजनीति के बिल्कुल उलट जा रही है। उन्होंने कहा, “हम उनके (राहुल गांधी) अथक परिश्रम और अद्वितीय बलिदान से विश्वासघात नहीं कर सकते।”

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता इस हद तक बढ़ गई है कि चुनाव नज़दीक होने के बावजूद चुनाव आयोग को दिए जाने वाले पोलिंग स्टेशन एजेंटों की सूची तक जानबूझकर रोकी जा रही है। उन्होंने कहा, “कोई भी राजनीतिक पार्टी यह नहीं सोचेगी कि चुनाव नज़दीक होने पर उसके सांसद द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी जाने वाली पोलिंग एजेंटों की सूची को रोका जाए। लेकिन कांग्रेस पार्टी में ऐसा हो रहा है।”

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव मार्च–अप्रैल में प्रस्तावित हैं और ऐसे समय में पार्टी की आंतरिक खींचतान पर जोतिमणि ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस आए दिन जनता के मुद्दों के बजाय गलत कारणों से सुर्खियों में रहती है। उनके मुताबिक, राजनीतिक गतिविधियों और वैचारिक रुख को कमजोर करने के प्रयास बेहद पीड़ादायक हैं।

जोतिमणि ने चेतावनी दी कि तमिलनाडु आज सांप्रदायिक, विभाजनकारी और हिंसक ताकतों से अभूतपूर्व खतरे का सामना कर रहा है। सांसद के अनुसार एक भीड़ सत्ता पर काबिज़ होने की फिराक में है, जो सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान, जनकल्याणकारी राजनीति और विकास जैसे मूल्यों को दफन करना चाहती है। उन्होंने याद दिलाया कि ये मूल्य के. कामराज और ‘पेरियार’ ई.वी. रामस्वामी जैसे नेताओं ने पोषित किए थे।

सांसद के अनुसार इस पृष्ठभूमि में सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे आगामी चुनावों को अत्यंत सावधानी से संभालें, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस पार्टी ने उस भारी जिम्मेदारी को सही मायने में समझा है। जोतिमणि ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को तमिलनाडु के उन लोगों को नहीं छोड़ना चाहिए जो सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और राज्य के अधिकारों के लिए डटे हुए हैं।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भले ही कांग्रेस लगभग 60 वर्षों से राज्य की सत्ता से बाहर रही हो, फिर भी उसके कार्यकर्ता हर गांव में गर्व से पार्टी का झंडा उठाए हुए हैं और उनकी भावनाओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार, बिना किसी अनुशासन के जारी आंतरिक गुटबाजी पार्टी को लगातार नुकसान पहुंचा रही है।

अंत में जोतिमणि ने कहा, “जनता की समस्याओं पर चर्चा किए बिना और केवल चुनावी गणित के आधार पर राजनीति करने से, कुछ लोगों के स्वार्थी हितों के कारण तमिलनाडु कांग्रेस धीरे-धीरे विनाश के रास्ते पर जा रही है। इसे रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस की पहचान और सम्मान के. कामराज की विरासत और नेहरू–गांधी परिवार के बलिदानों से जुड़ा है, जिसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाना चाहिए।

इस बयान पर TNCC अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने टिप्पणी करने से इनकार किया, जबकि उनके करीबी सूत्रों ने आरोपों को गलत बताया है। पार्टी के भीतर चल रहे इन घटनाक्रमों ने तमिलनाडु कांग्रेस की आंतरिक स्थिति और आगामी चुनावों की रणनीति पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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