राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रविवार को एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। यही नहीं, उन्होंने तेज प्रताप को परिवार से भी बाहर कर दिया है। यह निर्णय तेज प्रताप द्वारा एक महिला के साथ तस्वीर साझा करने और उसे अपनी 12 साल पुरानी गर्लफ्रेंड बताने के एक दिन बाद आया है।
तेज प्रताप यादव की ओर से शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया गया था, जिसमें उन्होंने एक महिला के साथ तस्वीर डालते हुए उसे अपनी प्रेमिका बताया था। पोस्ट के अनुसार, दोनों का 12 साल पुराना रिश्ता है। हालांकि, बाद में उन्होंने वह पोस्ट डिलीट कर दिया और दावा किया कि उनका अकाउंट हैक कर लिया गया था और तस्वीर से छेड़छाड़ की गई थी।
इस पूरे विवाद के बाद, लालू यादव ने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक बयान जारी कर कहा,“व्यक्तिगत जीवन में नैतिक मूल्यों की अनदेखी, सामाजिक न्याय की हमारी सामूहिक लड़ाई को कमजोर करती है। मेरे बड़े बेटे तेज प्रताप की गतिविधियाँ, सार्वजनिक आचरण और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। इन परिस्थितियों में, मैं उन्हें पार्टी और परिवार दोनों से अलग कर रहा हूँ। अब से उनका कोई भी भूमिका इनमें नहीं होगी।”
लालू यादव ने आगे लिखा, “व्यक्तिगत जीवन में क्या सही है और क्या गलत, इसका निर्णय लेने की क्षमता उसमें है। जो लोग उसके साथ रहना चाहते हैं, वे अपना निर्णय स्वयं लें। मैंने हमेशा सार्वजनिक जवाबदेही में विश्वास रखा है और हमारे परिवार के अनुशासित सदस्य इस सिद्धांत का पालन करते हैं।”
यह पहली बार नहीं है जब तेज प्रताप यादव किसी विवाद में घिरे हों। इससे पहले भी वे अपने बयानों, पहनावे और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। कभी कृष्ण रूप धारण कर मंदिरों में पूजा करते दिखते हैं, तो कभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं।
लालू यादव का यह कदम न सिर्फ राजनीतिक रूप से एक सख्त संदेश देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि RJD अब आंतरिक अनुशासन को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी। तेज प्रताप को पार्टी से निष्कासन और परिवार से बाहर करने का फैसला यह भी संकेत देता है कि लालू यादव अब अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को ही पार्टी की विरासत सौंपने के स्पष्ट संकेत दे चुके हैं।
तेज प्रताप यादव की राजनीतिक हैसियत पर इस घटनाक्रम का गहरा असर पड़ सकता है। पार्टी से निष्कासित होने के बाद उनका आगे क्या रुख रहेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। उन्होंने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राजनीतिक गलियारों में लालू यादव के इस फैसले को कठोर लेकिन निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो उनके संगठनात्मक नियंत्रण और परिवार की छवि को बनाए रखने के प्रयासों को दर्शाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप यादव अब क्या रुख अपनाते हैं — खुद की नई राजनीतिक राह चुनते हैं या आत्ममंथन कर वापसी की कोशिश करते हैं।
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