राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के स्थापना दिवस समारोह में एक बार फिर बिहार की राजनीति में पुरानी कड़वी यादें ताजा हो गईं। समारोह के दौरान आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सीवान के कुख्यात गैंगस्टर व पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के पक्ष में नारे लगाए “शहाबुद्दीन जी अमर रहें!” — और मंच से शाहबुद्दीन का खुलकर महिमामंडन किया। यह वही शहाबुद्दीन है, जिस पर चंदा बाबू के दो बेटों को तेजाब से नहलाकर मार डालने का आरोप और सजा हो चुकी है। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
वीडियो में तेजस्वी यादव के साथ मंच पर मौजूद राजद के कार्यकर्ता भी पूरे जोश में ‘शहाबुद्दीन अमर रहें’ के नारे लगाते नजर आए। इस पर मुस्लिम कट्टरपंथी वर्ग ने जहां खुशी जताई, वहीं बड़ी संख्या में लोग पूछ रहे हैं कि क्या तेजस्वी अब उसी राह पर हैं जिस पर उनके पिता लालू यादव ने कभी शहाबुद्दीन को राजनीतिक संरक्षण देकर अपराध का राजनीतिकरण किया था?
जानकारी के अनुसार, तेजस्वी यादव अब शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी की ओर से टिकट देने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में तेजस्वी ने शहाबुद्दीन के घर जाकर उसकी पत्नी हीना शहाब और बेटे ओसामा से मुलाकात की थी। इससे पहले वे उसकी बेटी हेरा शहाब के निकाह में भी शामिल हो चुके हैं।
मोहम्मद शहाबुद्दीन 90 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में सीवान में आतंक का पर्याय बन चुका था। आरजेडी के संरक्षण में वह चार बार सांसद बना और हत्या, अपहरण, फिरौती, रंगदारी जैसे कई मामलों में सजा काट चुका था। सबसे कुख्यात मामला था चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश और सतीश को तेजाब से जिंदा जला देने का। जमीन और रंगदारी के झगड़े में इन दोनों की शहाबुद्दीन ने अपहरण करवा कर अपनी कोठी पर ले जाकर हत्या करवा दी थी। तीसरे बेटे राजीव रौशन इस जघन्य कांड के गवाह थे, उनकी भी कोर्ट जाते समय हत्या कर दी गई।
इस केस में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शहाबुद्दीन को उम्रकैद हुई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। तत्कालीन CJI रंजन गोगोई ने शहाबुद्दीन की याचिका को कुछ ही मिनटों में खारिज कर दिया था। मई 2021 में कोरोना महामारी के दौरान शहाबुद्दीन की दिल्ली की तिहाड़ जेल में मौत हो गई थी। इसके बाद उसकी पत्नी हीना शहाब ने 2024 का लोकसभा चुनाव सीवान से निर्दलीय लड़ा, लेकिन हार गईं। फिर राजद ने उसे पार्टी में शामिल कर लिया।
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तेजस्वी यादव द्वारा एक सजायाफ्ता अपराधी के पक्ष में नारे लगाने को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या राजद फिर से ‘जंगलराज’ की राह पर लौट रहा है? क्या चंदा बाबू जैसे पीड़ितों की न्याय की लड़ाई को ठेंगा दिखाया जा रहा है? तेजस्वी यादव के इस कदम को बिहार की राजनीति में एक खतरनाक संदेश के रूप में देखा जा रहा है – जिसमें सजा काट चुके कुख्यात अपराधियों को फिर से राजनीतिक रूप से पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है।
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। अब देखना है कि जनता और विपक्ष इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या तेजस्वी यादव इस विवादित रुख से पीछे हटते हैं या इसे ही अपनी चुनावी रणनीति बनाते हैं।
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