“यूरोपीय संघ अमेरिका के बिना अपनी रक्षा नहीं कर सकता”

Nato महासचिव मार्क रट का दावा

“यूरोपीय संघ अमेरिका के बिना अपनी रक्षा नहीं कर सकता”

"The EU cannot defend itself without the US"

नाटो महासचिव और अमेरिकी नागरिक मार्क रट ने दावा किया है कि अमेरिका के बिना यूरोपीय संघ (EU) अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता। उन्होंने यूरोपीय संसद में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यूरोपीय संघ के सदस्य देश अपने दम पर रक्षा करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 10 प्रतिशत तक सैन्य खर्च करना पड़ेगा, और इसके बावजूद भी यह पर्याप्त नहीं हो सकता।

रट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यूरोपीय संघ के भीतर अमेरिका पर सुरक्षा निर्भरता कम करने की मांग तेज हो चुकी है। जनवरी के मध्य में EU के रक्षा आयुक्त एंड्रियस कुबिलियस ने दावा किया था कि स्वतंत्र सैन्य कार्रवाई के लिए EU को 1 लाख सैनिकों वाली स्थायी सेना की जरूरत है। हालांकि, रट ने इस तरह की योजनाओं को अव्यावहारिक बताने की कोशीश में लगे है। उन्होंने यूरोपीय संसद में अपने भाषण के दौरान कहा, “अगर यहां कोई यह सोचता है कि यूरोपीय संघ या पूरे यूरोप को अमेरिका के बिना बचाया जा सकता है, तो सपने देखते रहिए। यह संभव नहीं है।”

नाटो प्रमुख ने यह भी चेतावनी दी कि जो देश या ब्लॉक “अकेले चलने” की इच्छा रखते हैं, उन्हें यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि केवल 5 प्रतिशत GDP रक्षा खर्च से वे वहां पहुंच सकते हैं। उनके मुताबिक, इस लक्ष्य के लिए कम से कम दोगुना खर्च करना होगा, साथ ही यूरोप को अपनी खुद की परमाणु क्षमता विकसित करनी पड़ेगी। रट के अनुसार, “परमाणु क्षमता विकसित करने में अरबों, अरबों यूरो खर्च होते हैं। और अगर आप अकेले जाने की कोशिश करेंगे, तो आप हार जाएंगे।”

गौरतलब है कि नाटो ने पिछले साल हेग में हुए शिखर सम्मेलन में 5 प्रतिशत रक्षा खर्च के लक्ष्य पर सहमति जताई थी। यह मांग सबसे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रखी थी। रट ने ट्रंप की खुले तौर पर सराहना करते हुए कहा था कि उनके दबाव की वजह से स्पेन, इटली, बेल्जियम और कनाडा जैसे देशों ने न सिर्फ मौजूदा 2 प्रतिशत रक्षा खर्च के लक्ष्य को गंभीरता से लिया, बल्कि नए 5 प्रतिशत लक्ष्य पर भी सहमति जताई।

वहीं यूरोपीय संसद में भाषण के दौरान रट ने एक बार फिर ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि ट्रंप ने वर्षों से धीमे रवैय्ये वाले नाटो सदस्यों को अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए मजबूर किया। वॉशिंगटन लगातार संकेत दे रहा है कि वह यूरोपीय सहयोगियों की रक्षा से जुड़े अपने दायित्वों को धीरे-धीरे कम करेगा। पिछले हफ्ते पेंटागन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की प्राथमिकता अब अमेरिकी मातृभूमि की रक्षा और चीन को रोकना होगी।

इस बीच, यूक्रेन शांति वार्ता में अमेरिका की मध्यस्थता के दौरान EU को खुद को हाशिये पर महसूस करना पड़ा है। इसके अलावा, ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को हासिल करने के प्रयासों को लेकर भी वॉशिंगटन और ब्रुसेल्स के बीच टकराव देखने को मिला है। कुछ यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि इससे 80 साल के अटलांटिकवाद के युग का अंत हो सकता है।

रट के बयान ने इस सवाल को केंद्र में लाया है की क्या यूरोप वास्तव में अमेरिका के बिना अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा सकता है, या फिर उसे लंबे समय तक वॉशिंगटन पर निर्भर रहना ही पड़ेगा।

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