‘जनता ने नकार दिया, अदालत से जनादेश नहीं पलटा जा सकता’; सुराज की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार चुनाव रद्द करने से किया इनकार

‘जनता ने नकार दिया, अदालत से जनादेश नहीं पलटा जा सकता’; सुराज की याचिका खारिज की

‘The people have rejected it, the mandate cannot be overturned by the court’; Suraj's petition dismissed.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 फरवरी)को प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी की उस याचिका को खारिज कर दी, जिसमें 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों को रद्द करने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार की एक कल्याणकारी योजना के तहत महिलाओं को नकद राशि का हस्तांतरण कर मतदाताओं को प्रभावित किया गया।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। अदालत ने सबसे पहले जन सुराज पार्टी की याचिका दायर करने की वैधता पर सवाल उठाया। कोर्ट ने इस तथ्य की ओर इशारा किया कि जन सुराज ने बिहार की 243 में से 242 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायिक मंचों का इस्तेमाल जनता के जनादेश को पलटने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि किसी सरकारी योजना पर आपत्ति थी, तो उसे उसी समय चुनौती दी जानी चाहिए थी, न कि चुनाव परिणाम आने के बाद पूरे चुनाव को ही अवैध घोषित करने की मांग की जाए।

पीठ ने याचिका के गुण-दोष में जाने से इनकार करते हुए कहा कि यह मामला केवल एक राज्य से संबंधित है, इसलिए इसे संबंधित उच्च न्यायालय में उठाया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह भी जोड़ा कि कुछ मामलों में ‘फ्रीबीज़’ यानी चुनाव से पहले दी जाने वाली रियायतों और लाभों का मुद्दा गंभीर हो सकता है और ऐसे मामलों में भविष्य में न्यायालय विचार कर सकता है।

जन सुराज पार्टी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने आदर्श आचार संहिता (मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट) लागू रहने के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को नकद सहायता देकर चुनावी माहौल को प्रभावित किया। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार की एक महिला को स्वरोजगार के लिए 10,000 रुपये दिए गए, साथ ही आकलन के बाद 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता का वादा किया गया।

याचिका के अनुसार, इस योजना का लाभ राज्य की महिला स्वयं सहायता समूह नेटवर्क जीविका से जुड़े होने पर निर्भर था, और चुनावी अवधि के दौरान नए पंजीकरण की अनुमति भी दी गई। जन सुराज का दावा था कि आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले लगभग 1 करोड़ महिलाएं जीविका से जुड़ी थीं, जबकि बाद में लाभ पाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर करीब 1.56 करोड़ हो गई। पार्टी का तर्क था कि इससे चुनाव में समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित हुआ।

इन आधारों पर जन सुराज ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को अवैध घोषित करने और दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करने की स्वतंत्रता दी।

यह भी पढ़ें:

Bharat Taxi बनाम Ola-Uber: सहकारी मॉडल की एंट्री से भारत के कैब बाजार में क्या बदलेगा?

परीक्षा पे चर्चा: छात्रों को पीएम मोदी ने बताया 75वें जन्मदिन का किस्सा

प्रधानमंत्री मोदी की दो दिवसीय मलेशिया यात्रा; रक्षा सहयोग पर होगा फोकस

Exit mobile version