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Thursday, July 23, 2026
होमन्यूज़ अपडेटसरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गीत हुआ अनिवार्य

सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गीत हुआ अनिवार्य

केंद्र ने जारी किए नए प्रोटोकॉल

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केंद्र सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन या वादन को अनिवार्य करने संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आदेश के तहत विशेष राजकीय अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ का छह अंतरों वाला संस्करण प्रस्तुत किया जाएगा, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी।

तुलनात्मक रूप से राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की अवधि 52 सेकंड है। नए प्रोटोकॉल के अनुसार, महत्वपूर्ण सरकारी आयोजनो,  तिरंगा फहराने के अवसर पर और राष्ट्रपति की औपचारिक कार्यक्रमों में आगमन व प्रस्थान के समय ‘वंदे मातरम्’ का गायन या वादन किया जाएगा।

दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोह में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। यदि किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों चलाए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत किया जाएगा।

एक और महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत, राष्ट्रगान से पहले मृदंगम की ध्वनि बजाई जाएगी। साथ ही, सरकारी आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ के दौरान खड़े रहना अनिवार्य होगा। हालांकि यह अनिवार्यता सिनेमा हॉल जैसे स्थानों पर लागू नहीं होगी।

शिक्षण संस्थानों को भी निर्देश दिया गया है कि वे दिन की शुरुआत राष्ट्रगान से करें। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य विभिन्न सरकारी संस्थानों में समारोह संबंधी प्रक्रियाओं में एकरूपता और स्पष्ट प्रोटोकॉल सुनिश्चित करना है। स्वीकृत संस्करण और उसकी अवधि से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश संबंधित अधिकारियों को भेज दिए गए हैं।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक विशेष स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी कर समारोह का शुभारंभ किया।

7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक चलने वाला यह राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम उस ऐतिहासिक गीत की डेढ़ सौवीं वर्षगांठ को चिह्नित करता है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-आंदोलन का स्वरूप लिया और आज भी राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है।

‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में अक्षय नवमी के अवसर पर की थी, जो उस वर्ष 7 नवंबर को पड़ी थी। इस मुद्दे पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस और तकरार देखने को मिली।

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