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Sunday, February 1, 2026
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टैरिफ कमाई से सेना  मजबूत कर रहा अमेरिका, ग्रीनलैंड पर ट्रंप हलचल! 

ट्रंप ने यह नहीं बताया कि 1.5 ट्रिलियन डॉलर कहां और कैसे खर्च किए जाएंगे, न ही यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस से इस भारी बढ़ोतरी को मंजूरी कैसे ली जाएगी।

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वेनेजुएला के ताजा हालातों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा बजट को 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं ग्रीनलैंड पर ट्रंप प्रशासन की टिप्पणियों से वॉशिंगटन में राष्ट्रीय सुरक्षा, नाटो और कूटनीति को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए वह रक्षा बजट को 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। मौजूदा हालात मेंअमेरिका को सुरक्षित रखने के लिए यह बढ़ोतरी जरूरी है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल के जरिए बताया कि यह फैसला सीनेटरों, कांग्रेस सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत के बाद लिया गया है।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, “बजट 1 ट्रिलियन डॉलर नहीं होना चाहिए, बल्कि 1.5 ट्रिलियन डॉलर होना चाहिए।”

राष्ट्रपति ने कहा कि इस अतिरिक्त खर्च से अमेरिका एक ड्रीम मिलिट्री बना सकेगा, जो किसी भी दुश्मन के खिलाफ देश को पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत रखेगी। उन्होंने इस बढ़ोतरी को दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ से होने वाली कमाई से जोड़ा।

ट्रंप के ने कहा कि अगर टैरिफ से इतनी ज्यादा कमाई नहीं होती तो वह बजट को 1 ट्रिलियन डॉलर तक ही सीमित रखते। ट्रंप ने दावा किया कि पहले कई देश अमेरिका को लूटते रहे हैं।

अपने बयान में ट्रंप ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने जो. बाइडेन प्रशासन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकारी राजस्व काफी कम था, हालांकि उन्होंने इसके समर्थन में कोई आंकड़े नहीं दिए। ट्रंप ने यह भी कहा कि सैन्य बजट बढ़ाने के बावजूद अमेरिका अपना कर्ज घटाने में सक्षम रहेगा। साथ ही, सरकार मध्यम आय वर्ग के देशभक्त नागरिकों को उचित लाभांश देने की स्थिति में भी होगी।

हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि 1.5 ट्रिलियन डॉलर कहां और कैसे खर्च किए जाएंगे, न ही यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस से इस भारी बढ़ोतरी को मंजूरी कैसे ली जाएगी।

अमेरिका का रक्षा बजट पहले ही दुनिया में सबसे बड़ा है। इसे 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाना एक बड़ा कदम होगा, जिस पर घाटे और घरेलू जरूरतों को लेकर कांग्रेस में गहन बहस तय मानी जा रही है। चीन और रूस के साथ तनाव, यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व की अस्थिरता के कारण अमेरिका में रक्षा खर्च पर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।

दूसरी ओर ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप प्रशासन की टिप्पणियों ने अमेरिका की राजनीति में हलचल मचा दी है। प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बता रहा है, जबकि सांसद कूटनीति, नाटो सहयोग और आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं।

व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ग्रीनलैंड को अमेरिका द्वारा हासिल करने का मुद्दा राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के बीच सक्रिय चर्चा में है। उन्होंने इसे आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की आक्रामक गतिविधियों को रोकने से जोड़ा, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति रही है।

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कार्यकाल से ही ग्रीनलैंड पर बात करते रहे हैं और यह कोई नया विचार नहीं है।

उन्होंने कहा कि हर अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरों से निपटने के लिए सभी विकल्प खुले रखता है, हालांकि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है।

कांग्रेस में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की और एंगस किंग ने बल प्रयोग के संकेतों के खिलाफ चेतावनी दी। डेमोक्रेट सांसद पीट एगुइलर और टेड लियू ने नाटो सहयोगी को धमकाने और सैन्य कार्रवाई को अवैध बताया।

हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा कि ग्रीनलैंड से युद्ध का कोई इरादा नहीं है। कई सांसदों ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ पुराने सहयोग को रेखांकित किया।

ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और अमेरिका दशकों से यहां पिटुफिक स्पेस बेस के जरिए सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है, जो मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी में अहम भूमिका निभाता है।

दरअसल वेनेजुएला पर हमला करने के बाद ट्रंप ने कहा था कि सुरक्षा के लिहाज से उन्हें ग्रीनलैंड चाहिए। वहीं ट्रंप प्रशासन में डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड की एक तस्वीर पोस्ट की। इसमें ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे में दिखाकर लिखा गया ‘जल्द’। डेनमार्क ने इस पोस्ट पर गहरी आपत्ति जताई है|

 
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