प्रधानमंत्री ने सभी क्षेत्रों में नई प्रौद्योगिकी को अपनाने और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के लिए इसके उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रमुख क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी के उपयोग का भी आग्रह किया।
आगामी एआई इम्पैक्ट समिट के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सभी व्यक्तियों और कंपनियों को नए अवसरों की खोज करने और विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ने के लिए इस समिट का लाभ उठाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास विशालता, विविधता और लोकतंत्र का अनूठा संयोजन है, जिसके कारण दुनिया भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भरोसा करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें अपनी तकनीक से प्रभाव पैदा करने के साथ-साथ दुनिया को प्रेरित भी करना होगा। उन्होंने सीईओ और विशेषज्ञों से भारत को वैश्विक एआई प्रयासों के लिए एक उपयुक्त केंद्र बनाने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने डेटा सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसे एआई इकोसिस्टम की दिशा में काम करना चाहिए जो पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित हो।
इस उच्चस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में विप्रो, टीसीएस, एचसीएल टेक, जोहो कॉर्पोरेशन, एलटीआई माइंडट्री, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड, अदाणी कॉनेक्स, एनएक्सट्रा डेटा और नेटवेब टेक्नोलॉजीज सहित एआई क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों के सीईओ के साथ-साथ आईआईआईटी हैदराबाद, आईआईटी मद्रास और आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों ने भाग लिया।



