उन्होंने कहा कि मराठी की राजनीति करने वाले लोग ही मराठी शिक्षा का नुकसान कर रहे हैं। यही नहीं, जिन शिक्षकों ने मराठी माध्यम से पढ़ाई की थी, उन्हें यह कहकर नौकरी से वंचित कर दिया गया कि उनकी पढ़ाई मराठी में है| इस अन्यायपूर्ण फैसले को भाजपा सरकार ने बदला।
हिंदी को थोपने के आरोपों पर भातखळकर ने सफाई दी कि हिंदी ऐच्छिक भाषा है, अनिवार्य नहीं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने 20–25 वर्षों में पहली बार मातृभाषा में शिक्षा देने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है, जिसके तहत महाराष्ट्र में अब मराठी अनिवार्य कर दी गई है।
केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा तक मातृभाषा में देने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने तीन-भाषा फार्मूला अपनाया है, जिसमें मराठी अनिवार्य, अंग्रेज़ी ज्ञान की भाषा और तीसरी भाषा ऐच्छिक है।
राज ठाकरे के सवाल पर कि क्या आईएएस अफसरों को मराठी से बचाने के लिए हिंदी थोपी जा रही है, भातखळकर ने कहा कि अधिकारी अपना कैडर खुद चुनते हैं और महाराष्ट्र में तो मराठी में बोलना और मराठी नामपट्ट (साइनबोर्ड) पहले से ही अनिवार्य हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के लिए भी मराठी पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है, जो पहले नहीं था।
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