इसके अलावा सोमवार को राज्यसभा में तीन मनोनीत सदस्यों समेत कुल पांच राज्यसभा सांसदों ने संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली। सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने पर सबसे पहले असम गण परिषद के बीरेंद्र प्रसाद वैश्य ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली।
राज्यसभा के सभापति ने सदानंदन मास्टर के जीवन को साहस और अन्याय के प्रतिरोध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सदानंदन मास्टर शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे। एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सदन ने उनके योगदान की प्रशंसा की। युवा सशक्तिकरण के प्रति उनके जुनून का सदन में उल्लेख किया गया।
गौरतलब है कि वर्ष 1994 में हुई एक राजनीतिक हिंसा में उन्होंने ने अपने दोनों पैर खो दिए थे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि सी. सदानंदन मास्टर का जीवन साहस और अन्याय के आगे झुकने से इंकार का प्रतीक है।
वहीं, राज्यसभा में बतौर मनोनीत सांसद आए हर्षवर्धन श्रृंगला ने एक राजनयिक, बुद्धिजीवी और रणनीतिक विचारक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे भारत के विदेश सचिव रह चुके हैं।
वहीं, डॉ. मीनाक्षी जैन एक विदुषी, शोधकर्ता और इतिहासकार हैं। राज्यसभा सभापति ने सदन में उनके विशिष्ट कार्यों की सराहना की और शिक्षा, साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान में उनके योगदान का उल्लेख किया। डॉ. मीनाक्षी जैन शिक्षा, साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में उनके कार्यों ने अकादमिक विमर्श को महत्वपूर्ण रूप से समृद्ध किया है।
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