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पुतिन की मांगें जिनके कारण ट्रंप ने रद्द की अमेरिका-रूस शिखर वार्ता!

यूक्रेन के ‘समर्पण’ की शर्तें

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ‘मैक्सिमलिस्ट’ यानी अधिकतम मांगों के कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्तावित अमेरिका-रूस शिखर वार्ता रद्द कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुतिन की शर्तें किसी समझौते का आधार नहीं बल्कि यूक्रेन की संपूर्ण संप्रभुता के समर्पण की मांग करती हैं।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने हाल ही में ट्रंप प्रशासन को एक मेमो भेजा था, जिसमें यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए पुतिन की शर्तें सूचीबद्ध थीं। इन तथाकथित मूल कारणों (root causes) का सार यही था की यूक्रेन को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर करना।

मेमो प्राप्त होने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बातचीत की, लेकिन यह स्पष्ट हो गया कि पुतिन वास्तविक वार्ता के इच्छुक नहीं हैं। इसके बाद ट्रंप ने वह शिखर सम्मेलन रद्द कर दिया, जिसे उन्होंने पहले पुतिन से फोन पर चर्चा के बाद घोषित किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन की मांगें पिछले कई वर्षों से लगभग अपरिवर्तित हैं और इनका उद्देश्य यूक्रेन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता को मिटाना है।

जून में तुर्की की मध्यस्थता में हुई वार्ता के दौरान रूस ने ये मांगें औपचारिक रूप से लिखित रूप में यूक्रेन को सौंपी थीं।जिसके अनुसार 2014 से कब्जा किए गए यूक्रेनी क्षेत्रों क्राइमिया, डोनेत्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज़झिया को रूस का हिस्सा मानने की शर्त। इन पांच प्रांतों के अलावा, रूस ने उन सभी क्षेत्रों पर भी दावा किया है, जिन पर वह वर्तमान में नियंत्रण में नहीं है।

यूक्रेन की सीमा के अंदर एक “बफर ज़ोन” (सुरक्षा क्षेत्र) बनाने की मांग, जिससे यूक्रेन की भूमि और घट जाएगी। इस ज़ोन की लंबाई अनिर्दिष्ट है, लेकिन रूस के पूर्व राष्ट्रपति और सुरक्षा परिषद सदस्य दिमित्री मेदवेदेव द्वारा साझा किए गए नक्शे में यह ज़ोन लगभग पूरे यूक्रेन को शामिल करता है।

यूक्रेनी सेना के आकार, हथियारों और तैनाती पर कड़े प्रतिबंध, जो प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी पर थोपे गए वर्साय संधि की शर्तों की याद दिलाते हैं। यूक्रेन को NATO की सदस्यता से हमेशा के लिए वंचित करना और विदेशी सैनिकों की तैनाती पर रोक लगाना।

पुतिन की शर्तें केवल सैन्य या राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन की दिशा में भी हैं। उन्होंने यह भी मांगा है कि, रूसी भाषा को यूक्रेन के आधिकारिक व्यापार और सरकारी कामकाज में फिर से शामिल किया जाए, प्रो-रूस यूक्रेनी ऑर्थोडॉक्स चर्च को पुनर्स्थापित किया जाए, और तथाकथित “राष्ट्रवादी संगठनों” पर प्रतिबंध लगाया जाए। यूक्रेनी राष्ट्रवादियों के अनुसार, यह योजना यूक्रेन की राष्ट्रीय पहचान को मिटाने और देश को रूस की छवि में ढालने की कोशिश है।

वॉशिंगटन डीसी स्थित जैम्सटाउन फाउंडेशन की रूस विशेषज्ञ क्सेनिया किरिलोवा ने कहा, “ऐसी शर्तें यूक्रेन के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। पुतिन जानबूझकर असंभव शर्तें रख रहे हैं ताकि वार्ता लंबी खिंचे और यूक्रेन पर दबाव बढ़े।” उन्होंने आगे कहा, “पुतिन गर्मी के दौरान नए सैन्य हमले की उम्मीद में हैं ताकि यूक्रेनी समाज की इच्छा शक्ति को तोड़ा जा सके। अब केवल यह उम्मीद है कि ट्रंप पुतिन की इन चालों से जल्दी तंग आ जाएं।”

अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी माना जा रहा है कि पुतिन की ये मांगें किसी वास्तविक शांति प्रस्ताव से बहुत दूर हैं।

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