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गाज़ा में भुखमरी पर बोले ट्रंप: “तस्वीरें दर्दनाक, लेकिन खाना चुरा रहे हैं”

नेतन्याहू ने कहा, "कोई भुखमरी नहीं है"

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गाज़ा पट्टी में बढ़ते मानवीय संकट और भुखमरी से बच्चों की मौतों पर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (26 जुलाई) को इस मसले पर विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा, “तस्वीरें भयानक हैं, लेकिन लोग खाना चुरा रहे हैं।” ट्रंप इन दिनों स्कॉटलैंड की चार दिवसीय यात्रा पर हैं, एक पत्रकार द्वारा गाज़ा की भुखमरी पर पूछे गए सवाल के जवाब में बोले, “हमने गाज़ा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन को 60 मिलियन डॉलर का दान दिया, लेकिन बाकी किसी देश ने कुछ नहीं किया।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “अगर हम (अमेरिका) वहां नहीं होते, तो लोग भूख से मर जाते।”

हालांकि ट्रंप ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि वो लोग कौन हैं जो खाना हड़प रहे हैं, माना जा रहा है कि उनका इशारा हमास की ओर था। इज़रायल लगातार आरोप लगाता रहा है कि हमास मानवीय सहायता को अपने फायदे के लिए रोकता है या उसे नियंत्रित करता है।

दूसरी ओर, इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाज़ा में भुखमरी की खबरों को खारिज करते हुए दावा किया, “गाज़ा में कोई भुखमरी नहीं है।” उन्होंने कहा कि अगर इज़रायल ने सहायता की अनुमति न दी होती, “तो गाज़ा के लोग बहुत पहले ही भूख से मर चुके होते।” यरुशलम में एक ईसाई सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने बताया कि अक्टूबर 2023 से अब तक करीब 1.9 मिलियन टन राहत सामग्री गाज़ा में भेजी जा चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह “अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा तय की गई मात्रा के अनुरूप है।”

गाज़ा से आई तस्वीरों में कुपोषित बच्चों और खाली बर्तनों के साथ भूख से बेहाल परिवारों की हालत ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। मानवीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर राहत कार्यों में तेजी नहीं आई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

हालांकि नेतन्याहू और ट्रंप दोनों अपनी-अपनी बातों में मानवीय सहायता की भूमिका को स्वीकार करते हैं, लेकिन उनके बयान इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि राजनीतिक एजेंडा और भू-राजनीतिक दांव इस संकट के केंद्र में हैं। पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ही अकेला देश है जो गाज़ा के लिए “भारी मात्रा में खाना, पैसा और सामग्री” भेज रहा है, जबकि बाकी देश “कुछ नहीं कर रहे।” उन्होंने कहा, “दूसरे देश भी कुछ करें, ऐसा नहीं है कि सिर्फ अमेरिका पर यह बोझ हो।”

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