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“पुतिन चाहें तो यूक्रेन को बर्बाद कर देंगे” जेलेंस्की की मांग पर भड़के ट्रंप !

कीव मानता है कि रूस पर सख्त दबाव ही युद्ध को खत्म करने का एकमात्र रास्ता है, जबकि ट्रंप का झुकाव पुतिन द्वारा यूक्रेन के लिए दिए एक नए युद्धविराम प्रस्ताव की ओर झुकता है, जिसमें यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र रूस को देना होगा, जबकि खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया के कुछ हिस्से यूक्रेन के पास रहेंगे। 

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रविवार (19 अक्तूबर) को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की कि वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध समाप्त करने के लिए और अधिक दबाव डालें, जिस पर भड़के ट्रंप ने कहा की पुतिन चाहे तो यूक्रेन को बर्बाद कर देंगे। मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में हुई बंद कमरे की बहस की जानकारी सामने आई है।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले शुक्रवार को हुई मुलाकात में ट्रंप ने ज़ेलेंस्की से कहा कि अगर यूक्रेन को शांति चाहिए तो उसे पूर्वी डोनबास क्षेत्र रूस को सौंप देना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि दोनों नेताओं के बीच तीखी और अपशब्दों से भरी नोकझोंक हुई। ट्रंप ने कथित तौर पर ज़ेलेंस्की से कहा, “अगर तुमने ऐसा नहीं किया, तो यह यूक्रेन का अंत होगा।” इसके जवाब में ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट कहा कि यूक्रेन अपनी भूमि का कोई हिस्सा नहीं छोड़ेगा।

रविवार शाम अपने संबोधन में ज़ेलेंस्की ने कहा, “दुनिया देख रही है कि रूस सिर्फ ताकत के जवाब में प्रतिक्रिया देता है। इसलिए, शांति केवल ताकत से ही संभव है। यूक्रेन आतंकियों को उनके अपराधों की कोई कीमत नहीं देगा, और हम इस रुख के लिए अपने साझेदारों के समर्थन पर भरोसा करते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने बैठक के दौरान ज़ेलेंस्की द्वारा दिखाए गए फ्रंटलाइन मैप्स को नकार दिया और कहा कि अमेरिका कीव को लंबी दूरी की टोमहॉक मिसाइलें भेजने का कोई निर्णय नहीं लेने वाला। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि पुतिन बार-बार अपने युद्धविराम वादों से मुकरते रहे हैं, जिससे उनके साथ बातचीत निराशाजनक रही है।

NBC से बातचीत में जब ज़ेलेंस्की से पूछा गया कि क्या ट्रंप को पुतिन के प्रति और सख्त रुख अपनाना चाहिए, तो उन्होंने कहा, “हाँ, बिल्कुल, और उससे भी ज़्यादा, क्योंकि पुतिन कुछ हद तक हमास जैसे हैं, लेकिन उससे भी मज़बूत। इसलिए ज़्यादा दबाव की ज़रूरत है।”

ज़ेलेंस्की ने यह भी कहा कि आने वाली बुडापेस्ट वार्ता में, जो ट्रंप और पुतिन के बीच प्रस्तावित है, यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हम सच में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति चाहते हैं, तो इस त्रासदी के दोनों पक्ष मौजूद होने चाहिए। कैसे हमारे बिना ही हमारे बारे में कोई सौदा हो सकता है, ?”

उधर, ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि वह यूक्रेन को टोमहॉक मिसाइलें भेजने के पक्ष में क्यों नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमें एक बात याद रखनी चाहिए, हमें इन हथियारों की जरूरत खुद के लिए भी है। हम अपना सारा शस्त्रागार यूक्रेन को नहीं दे सकते।”

इस विवाद के बाद ट्रंप और ज़ेलेंस्की के संबंधों में तनातनी खुलकर सामने आ गई है। कीव मानता है कि रूस पर सख्त दबाव ही युद्ध को खत्म करने का एकमात्र रास्ता है, जबकि ट्रंप का झुकाव पुतिन द्वारा यूक्रेन के लिए दिए एक नए युद्धविराम प्रस्ताव की ओर झुकता है, जिसमें यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र रूस को देना होगा, जबकि खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया के कुछ हिस्से यूक्रेन के पास रहेंगे।

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