ट्रंप की नौसेना गठबंधन की योजना को झटका: ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सेना भेजने से किया इनकार

ट्रंप की नौसेना गठबंधन की योजना को झटका: ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सेना भेजने से किया इनकार

Trump's naval alliance plan suffers setback: Britain, Japan and Australia refuse to send troops

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप  द्वारा प्रस्तावित नौसैनिक गठबंधन को बड़ा झटका लगा है। ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने के अमेरिकी आग्रह को ठुकरा दिया है। इन देशों ने साफ संकेत दिया है कि वे सीधे सैन्य टकराव के बजाय कूटनीति और सीमित तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता देंगे।

दरअसल अमेरिका ने ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जलमार्ग को अवरुद्ध करने के बाद, वैश्विक सहयोगियों से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए नौसैनिक बल भेजने का आग्रह किया था। व्हाइट हाउस की ओर से दबाव बनाने के लिए सोशल मीडिया पोस्ट और कई देशों के नेताओं से सीधे फोन कॉल भी किए गए, लेकिन सहयोगियों की प्रतिक्रिया अपेक्षा से उलटी रही।

ब्रिटेन ने युद्धपोत भेजने से किया इनकार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमेर ने सप्ताहांत में हुई फोन बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति से स्पष्ट कहा कि लंदन फिलहाल शाही नौसेना के विध्वंसक जहाजों को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में भेजने के लिए तैयार नहीं है। ब्रिटेन का मानना है कि सीधे सैन्य तैनाती से क्षेत्रीय युद्ध और भड़क सकता है। इसके बजाय लंदन ने माइन-हंटिंग ड्रोन जैसी तकनीकी सहायता देने का प्रस्ताव रखा है।

ब्रिटेन के ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुल जाए, लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम इस संकट को और न बढ़ाएं। हम माइन-हंटिंग ड्रोन जैसे विकल्पों से योगदान दे सकते हैं।”

ऑस्ट्रेलिया ने भी जताई अनिच्छा

अमेरिकी प्रस्ताव को केवल यूरोप में ही नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी समर्थन नहीं मिला। ऑस्ट्रेलिया की परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने कहा कि कैनबरा फिलहाल इस क्षेत्र में जहाज भेजने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने एबीसी रेडियो से बातचीत में कहा, “हमें जानकारी दी गई है कि हम हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज भेजने का इरादा नहीं रखते। हम आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए तैयार हैं, लेकिन नौसैनिक तैनाती की योजना नहीं है।”

जापान ने भी जताई कानूनी बाधा

ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इस जलमार्ग पर अत्यधिक निर्भर होने के बावजूद जापान ने भी अमेरिकी अनुरोध अस्वीकार कर दिया। सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नीति अधिकारी ताकायुकी कोबायाशी ने कहा कि सक्रिय युद्ध क्षेत्र में जापान आत्मरक्षा बल को भेजने की संवैधानिक और कानूनी सीमा बहुत ऊंची है।

सहयोगियों से ठुकराए जाने के बाद ट्रंप प्रशासन ने अब चीन पर भी दबाव बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति का तर्क है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले तेल का सबसे बड़ा लाभार्थी चीन है, इसलिए सुरक्षा में उसकी भी जिम्मेदारी बनती है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए बयान में ट्रंप ने कहा, “चीन को अपने तेल का लगभग 90 प्रतिशत इसी मार्ग से मिलता है। इसलिए यह उचित है कि जो देश इससे लाभान्वित होते हैं, वे इसकी सुरक्षा में योगदान दें।”

ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया के इनकार के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिका अपने पारंपरिक सहयोगियों के बीच भी पर्याप्त समर्थन जुटा नहीं पाया है। दरअसल यह सहयोगी देश क्षेत्रीय संघर्ष के व्यापक युद्ध में बदलने के जोखिम से बचना चाहते हैं, इसलिए वे सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए हुए हैं और कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं।

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