उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ती नजर आ रही है। कांग्रेस ने अमेठी और रायबरेली की सभी 10 विधानसभा सीटों पर दावा जताया है, जबकि सपा अपनी जीती हुई सीटें छोड़ने के पक्ष में नहीं दिख रही। खासकर उन क्षेत्रों को लेकर मतभेद हैं, जहां सपा के पूर्व विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं।
कांग्रेस राष्ट्रीय राजनीति में अपनी बढ़ती भूमिका और गठबंधन की ताकत का हवाला देते हुए अधिक सीटें मांग रही है। वहीं, सपा का जोर अपने संगठन और विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत चुनावी स्थिति बनाए रखने पर है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस की मांग के मुकाबले सपा काफी कम सीटें देने के पक्ष में है। हालांकि, सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अमेठी की पांच विधानसभा सीटों में पिछले चुनाव में सपा ने तीन और भाजपा ने दो सीटें जीती थीं। वहीं, रायबरेली की पांच सीटों में चार सपा और एक भाजपा के खाते में गई थी। कांग्रेस इन दोनों जिलों को अपनी पारंपरिक राजनीतिक जमीन मानते हुए सभी सीटों पर दावा कर रही है।
सपा के लिए ऊंचाहार सीट भी प्रतिष्ठा का सवाल है। यहां से विधायक रहे मनोज पांडेय भाजपा में शामिल होकर योगी सरकार में मंत्री बने। अमेठी से सपा के टिकट पर जीते राकेश प्रताप सिंह भी भाजपा में जा चुके हैं। सपा इन बागियों को चुनाव में चुनौती देना चाहती है।
कांग्रेस एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली के जरिए इंडिया गठबंधन की एकजुटता दिखाने की तैयारी में है। राजनीतिक दृष्टि से यह आयोजन उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे की बातचीत के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
अब दोनों दलों के सामने चुनौती है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति के बीच संतुलन बनाएं।
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