गुटेरेस ने यह संदेश शुक्रवार को जोहान्सबर्ग पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान दिया। वे जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।
गुटेरेस ने कहा, “अगले दो दिनों में जी20 नेताओं के लिए मेरा संदेश बहुत सरल है| अब लीडरशिप और विज़न दिखाने का समय है।” उन्होंने दुनिया भर में जारी संघर्षों, जलवायु परिवर्तन से उपजी अनिश्चितताओं, आर्थिक अस्थिरता, बढ़ती असमानता और वैश्विक सहायता में लगातार आ रही कमी पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि वैश्विक सैन्य खर्च तेजी से बढ़ रहा है, जिससे विकास के लिए जरूरी संसाधन घटते जा रहे हैं। उनका कहना था कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले G20 देश चाहें तो इन चुनौतियों को काफी हद तक कम कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आर्थिक विकास सभी वर्गों तक पहुंचे। यह वही रास्ता है जो दुनिया को भविष्य में अधिक सुरक्षित और शांतिपूर्ण बना सकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अफ्रीका की भूमिका को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अफ्रीकी देशों को उन सभी वैश्विक मंचों पर उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, जहां महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं| चाहे वे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के बोर्ड हों या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का मुद्दा।
उन्होंने सुझाव दिया कि जी20 इस “ऐतिहासिक अन्याय” को दूर करने में बड़ा योगदान दे सकता है और ऐसे सुधारों को आगे बढ़ा सकता है, जिससे विकासशील देशों विशेषकर अफ्रीका को वैश्विक नीति निर्धारण में अधिक आवाज और भागीदारी मिल सके। यह कदम आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक प्रशासन को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाएगा।
गुटेरेस ने यह भी कहा कि वे जी20 नेताओं से आग्रह करेंगे कि वे दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों सूडान, कांगो, माली, यूक्रेन, गाजा, हैती, यमन और म्यांमार में जारी हिंसा, अस्थिरता और मानवीय संकट को खत्म करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें।



