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Friday, July 31, 2026
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यूपी चुनाव: बसपा अकेले लड़ेगी, पीडीए परिवार दल गठबंधन बताया! 

बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में अहम भूमिका मिलने की चर्चाओं पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि अंतिम निर्णय हमेशा पार्टी प्रमुख मायावती ही करती हैं।

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने पार्टी की रणनीति, आकाश आनंद की भूमिका, समाजवादी पार्टी की प्रस्तावित पीडीए रथ यात्रा, गठबंधन की संभावनाओं समेत कई अहम मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बसपा आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी और पार्टी का गठबंधन किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि जनता से होगा।

बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में अहम भूमिका मिलने की चर्चाओं पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि अंतिम निर्णय हमेशा पार्टी प्रमुख मायावती ही करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया पार्टी के को-ऑर्डिनेटरों से शुरू होती है, जो अपने क्षेत्रों से मजबूत और टिकाऊ उम्मीदवारों का फीडबैक जुटाते हैं। यह पूरी रिपोर्ट मायावती के पास जाती है और अंतिम फैसला वही करती हैं।

विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति लगातार हो रही है। शाहाबाद और जेवर सीट को लेकर भी आकाश आनंद को प्रभारी बनाए जाने की चर्चा है, जो मायावती की अनुमति के बाद घोषित की जा सकती है।

विश्वनाथ पाल ने कहा कि बसपा का संगठनात्मक अभियान पहले से ही जारी है। जिन नेताओं और प्रभारीयों की नियुक्ति की जा रही है, वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर संगठन को मजबूत करने का काम कर रहे हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या आकाश आनंद युवा चेहरे के रूप में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के सामने चुनौती बनेंगे, तो उन्होंने इस तुलना को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया बार-बार आजाद समाज पार्टी को बसपा के साथ जोड़ने की कोशिश करता है, जबकि उसका कोई औचित्य नहीं है। वे राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं। घोसी-मऊ चुनाव में उनका प्रदर्शन सबने देखा है। पहले उनका वोट प्रतिशत देख लीजिए, फिर तुलना कीजिए। मैं उनके बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।

विधानसभा चुनाव में गठबंधन की संभावनाओं पर विश्वनाथ पाल ने दो टूक कहा कि बसपा किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी नेता बहन मायावती ने साफ कहा है कि हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। हमारा गठबंधन जनता से होगा, किसी दल से नहीं।

पेपर लीक संशोधन विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्वनाथ पाल ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं बिल्कुल नहीं होनी चाहिए और उत्तर प्रदेश में यह कई बार हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि बसपा इस मुद्दे को लंबे समय से उठा रही है। आज छात्र धरना दे रहे हैं, लेकिन हमारे राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद 2024 के चुनाव से पहले से ही इस मुद्दे को उठा रहे थे। जब कोई इसके खिलाफ नहीं बोल रहा था, तब भी बसपा इसका विरोध कर रही थी। यह पूरी तरह गलत है और इसे बंद होना चाहिए।

‘वंदे मातरम’ विधेयक पर विश्वनाथ पाल ने टिपप्णी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय मुद्दा है। मैं प्रदेश अध्यक्ष हूँ। इस विषय पर जो भी आधिकारिक प्रतिक्रिया होगी, वह बहन जी देंगी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि बसपा 2007 के चुनावी मॉडल पर ही काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम समाज और अन्य वर्गों के भाईचारा सम्मेलन लगातार आयोजित किए जा रहे हैं और पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने में जुटा है। 2007 में बिना किसी राजनीतिक दल के गठबंधन के हमने जनता का गठबंधन बनाकर सरकार बनाई थी। उसी रणनीति पर आज भी काम हो रहा है। हमें पूरा विश्वास है कि 2007 का इतिहास दोहराया जाएगा।

समाजवादी पार्टी की प्रस्तावित पीडीए रथ यात्रा पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि केवल बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की बात करना गलत है। बसपा का वोट बैंक पूरी तरह जागरूक है और किसी राजनीतिक अभियान से प्रभावित होने वाला नहीं है। बसपा का वोट इतना नादान नहीं है कि किसी के नाटक से इधर-उधर चला जाएगा। उल्टा समाजवादी पार्टी और भाजपा के वोट भी बसपा की ओर आ रहे हैं क्योंकि जनता तीनों सरकारों की तुलना कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि मायावती सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था सबसे बेहतर थी। शिक्षा, किसानों और व्यापारियों के हित में सबसे अधिक काम बसपा सरकार ने किए थे। उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, मेडिकल और पैरामेडिकल संस्थानों की स्थापना तथा किसानों को दी गई सुविधाओं का भी उल्लेख किया।

समाजवादी पार्टी के पीडीए अभियान पर तीखा हमला बोलते हुए विश्वनाथ पाल ने कहा कि पीडीए का वास्तविक अर्थ ‘परिवार दल अलायंस’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समाजवादी पार्टी वास्तव में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के हित में काम करना चाहती, तो सत्ता में रहते हुए एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की बैकलॉग भर्तियां नहीं रोकती।

मायावती सरकार ने सभी वर्गों को सरकारी नौकरियां दीं, अधिकारियों को पदोन्नति दी और महापुरुषों के सम्मान में जिलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और संस्थानों का निर्माण कराया, जबकि बाद की सरकारों ने उनके नाम बदलकर उनका अपमान किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं, लेकिन जब पार्टी सत्ता में थी तब उसने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के हितों की अनदेखी की।

पाल ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब तीनों सरकारों, बसपा, समाजवादी पार्टी और भाजपा, के कामकाज की तुलना कर रही है और उन्हें विश्वास है कि इस बार सभी वर्गों का समर्थन बसपा को मिलेगा तथा पार्टी एक बार फिर प्रदेश में सरकार बनाने में सफल होगी।
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