लोकसभा में मंगलवार (3 फरवरी) को भारी हंगामा देखने को मिला। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व थलसेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित संस्मरण (मेमॉयर) से जुड़े एक लेख का उल्लेख करने से रोक दिया गया। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी और आठ सांसदों को अनुशासनहीन आचरण के आरोप में निलंबित कर दिया गया।
हंगामे की शुरुआत राहुल गांधी ने एक ऐसे मुद्दे को फिर से उठाने की कोशिश की, जिस पर पीठ पहले ही सोमवार (2 फरवरी) को निर्णय दे चुकी थी। अध्यक्षता कर रहे कृष्ण प्रसाद टेन्नेटी ने उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण तक ही अपनी बात सीमित रखने को कहा। इसके बावजूद विवाद बढ़ता गया। कांग्रेस सांसदों ने विरोध में टेबल पर चढ़कर कागज फाड़े और उन्हें पीठ की ओर फेंका, जिसे अध्यक्ष ने गंभीर आपत्तिजनक आचरण बताया। इस अव्यवस्था के चलते सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
राहुल गांधी ने सदन में कहा कि उन्होंने संबंधित लेख को प्रमाणित किया है और उसका उल्लेख करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मैंने इसे प्रमाणित किया है।”
राहुल गांधी ने दावा किया कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। संसदीय नियमों के अनुसार, किसी दस्तावेज़ को प्रमाणित करने के लिए सदस्य को उस पर हस्ताक्षर कर उसकी सत्यता की पुष्टि करनी होती है। इस पर टेन्नेटी ने गांधी से दस्तावेज़ सदन के पटल पर रखने को कहा और कहा, “हम इसकी जांच करेंगे और आपको सूचित करेंगे।”
इसके बाद भी बहस जारी रहने पर सदन को दोपहर तीन बजे तक स्थगित कर दिया गया।
रुकावटों पर आपत्ति जताते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं ‘अनुमति’ शब्द पर आपत्ति कर रहा हूं। मुझे किसी से अनुमति नहीं दी जाती; मैं नेता प्रतिपक्ष हूं।” इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने जवाब दिया, “हर कोई अनुमति लेकर ही बोलता है, चाहे वह कोई भी हो। स्पीकर की अनुमति के बिना कोई नहीं बोलता”।
टेन्नेटी ने सदस्यों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा और व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “एक सदस्य ने मुझे ‘यार’ कहकर संबोधित किया, जिस पर मैंने आपत्ति की इसके बाद सदस्य टेबल पर चढ़ गए, कागज फाड़े और उन्हें पीठ की ओर फेंका, जो बेहद आपत्तिजनक है।” उन्होंने स्पष्ट किया, “टेबल पर चढ़ने का मतलब पीठ के बहुत करीब आना है, जो अत्यंत आपत्तिजनक है।” इस पूरे घटनाक्रम के बाद आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
कार्यवाही स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने सरकार पर जानबूझकर उन्हें बोलने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया गया।” उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा, “भारतीय किसानों को समझना चाहिए कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस व्यापार समझौते के जरिए उनकी मेहनत बेच दी है।”
किरण रिजिजू ने पीठ के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक पूर्व थलसेना प्रमुख की अप्रकाशित संस्मरण से उद्धरण देना चाहते थे, जो नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने केवल इतना कहा है कि राहुल गांधी जी अपना भाषण जारी रख सकते हैं, लेकिन वे नियमों के खिलाफ बातों को जबरन सदन में रखने पर अड़े नहीं रह सकते।”
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