हंगामे के कारण लोकसभा व राज्यसभा दोनों ही सदनों में प्रश्नकाल नहीं चल सका। लोकसभा की कार्यवाही प्रारंभ होते ही विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। वे प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे थे और इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष ने कई बार विपक्षी सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और प्रश्नकाल चलने देने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल सदन की महत्वपूर्ण कार्यवाही है और इसे बाधित नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए और लगातार नारेबाजी करते रहे। सदन में व्यवस्था बहाल नहीं होने पर लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
वहीं, राज्यसभा में विपक्ष नियम 267 के तहत चर्चा की मांग पर अड़ा रहा। राज्यसभा में भी कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने प्रदर्शनकारी छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की मांग उठाई। विपक्षी सांसद नियम 267 के अंतर्गत कार्यस्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर इस विषय पर तत्काल चर्चा करते आ रहे हैं।
गौरतलब है कि सोमवार को संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि विपक्ष जानबूझकर कर चर्चा नहीं होने दे रहा है। कांग्रेस लंबे समय से पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर चर्चा की मांग करती रही है, लेकिन अब जब सरकार ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक’ जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा कराने को तैयार है, तब विपक्ष सदन नहीं चलने दे रहा है।
दरअसल संसद के मानसून सत्र में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा लगातार विपक्ष के निशाने पर है। मंगलवार को भी दोनों सदनों में यही स्थिति देखने को मिली, जिससे संसद की कार्यवाही निर्धारित एजेंडे के अनुसार आगे नहीं बढ़ सकी।
