सोमवार को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में नीट परीक्षा और कथित पेपर लीक मामले का विषय उठाया। खड़गे ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है।
खड़गे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर वहां एकत्र हुए हैं। खड़गे ने कहा कि इन छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दा है।
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने हंगामा जारी रहने पर राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। 12 बजे कार्यवाही प्रारंभ होने पर हंगामा भी शुरू हो गया। विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे और अपनी सीटों से उठकर आगे आ गए।
दोपहर 2 बजे भी सदन में यही हुआ और कार्यवाही 2 बजकर 30 मिनट तक स्थगित कर दी गई। 2 बजकर 30 मिनट पर भी सदन में हंगामा जारी रहा और राज्यसभा की कार्यवाही को मंगलवार सुबह तक स्थगित कर दिया गया। इससे पहले सत्र के पहले दिन सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को संबोधित करते हुए नव-निर्वाचित सदस्यों का स्वागत किया और सभी सांसदों से राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने तथा सदन की गरिमा एवं मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया।
सभापति ने कहा कि राज्यसभा की हमेशा से सार्थक और गंभीर विचार-विमर्श की गौरवशाली परंपरा रही है, और उन्हें विश्वास है कि यह सत्र भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इस सत्र में कुल 19 बैठकें निर्धारित हैं और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा तथा निर्णय के लिए उपलब्ध इस बहुमूल्य समय का सदुपयोग करना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सभापति ने बताया कि इस सत्र से राज्यसभा सचिवालय ने सदन की कार्यवाही के लिए एआई-आधारित तात्कालिक अनुवाद सुविधा शुरू की है। यह सुविधा फिलहाल नौ भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है और सदस्यों की सीटों पर स्थापित मल्टीमीडिया उपकरणों के माध्यम से इसका उपयोग किया जा सकेगा।
सभापति ने कहा कि यह सत्र विधायी और विचार-विमर्श संबंधी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे सदन के कामकाज को समय पर पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि हर व्यवधान उन मुद्दों पर चर्चा को प्रभावित करता है जो देश और जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं। संसद जनता की आकांक्षाओं की प्रतिनिधि संस्था है और सदन में उपलब्ध समय का उपयोग जनहित से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा के लिए होना चाहिए।
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