राहुल गांधी की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए भाजपा सांसद बिप्लब देब ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को न तो संसदीय परंपराओं का ध्यान है और न ही संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास दिखाई देता है। जिस विधेयक पर चर्चा हो रही थी, राहुल गांधी उसका नाम तक सही ढंग से नहीं बता सके और बिना विषय पर केंद्रित करते हुए आरोप लगाते रहे। संसद में किसी भी मंत्री या सांसद पर आरोप लगाने के लिए तथ्यों और प्रमाणों का होना आवश्यक है। केवल सुर्खियां बटोरने के उद्देश्य से संसद में बयान देना लोकतांत्रिक राजनीति की भावना के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी को पहले अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। बार-बार इस प्रकार के आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे देश की नई पीढ़ी के बीच संसद की कार्यप्रणाली को लेकर गलत संदेश जाता है। संसद संविधान और स्थापित नियमों के अनुसार चलती है, इसलिए हर सदस्य को उन्हीं नियमों का पालन करना चाहिए।
भाजपा सांसद हर्ष मल्होत्रा ने भी राहुल गांधी के व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनका आचरण सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह अराजकतावादी जैसा है। राहुल गांधी संसदीय मर्यादा का पालन नहीं करते और सभापति के बार-बार टोकने के बावजूद अनसंसदीय भाषा का प्रयोग करते हैं। गृह मंत्री अमित शाह पर बिना किसी प्रमाण के गंभीर आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है। राहुल गांधी या तो अपने आरोपों को प्रमाणित करें या फिर सदन में माफी मांगें।
इस बीच, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने आरोप लगाया कि संसद में हुआ हंगामा पूर्व नियोजित था। सदन में पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए महत्वपूर्ण विधेयक पर गंभीर चर्चा चल रही थी, लेकिन राहुल गांधी ने नया विवाद खड़ा कर दिया।
जगदंबिका पाल ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने राहुल गांधी से यह स्पष्ट करने को कहा कि गृह मंत्री द्वारा कथित रूप से गोली चलाने का आदेश देने का कोई दस्तावेज या प्रमाण है या नहीं। बिना किसी साक्ष्य के ऐसे गंभीर आरोप लगाना देश को गुमराह करने का प्रयास है।
नाविकों की सप्लाई में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर, रूस और चीन भी पीछे
