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Monday, October 19, 2026
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यूपीएससी अध्यक्ष मनोज सोनी का इस्तीफा; पूजा खेडकर मामले कोई लेनदेन नहीं!

यूपीएससी में शामिल होने से पहले, मनोज सोनी ने गुजरात में दो विश्वविद्यालयों के कुलपति के रूप में कार्य किया।

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प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की यूपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर देशभर में इस वक्त जबरदस्त बहस चल रही है, ऐसे में केंद्रीय लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मनोज सोनी ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया है।मनोज सोनी का कार्यकाल 2029 तक था|यह आश्चर्य की बात है|सोनी ने निजी कारणों से इस्तीफा दिया है और कहा जा रहा है कि उनका पूजा खेडकर मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

पूजा खेडकर ने फर्जी विकलांगता और ओबीसी गैर-आपराधिक परत प्रमाण पत्र देकर केंद्रीय लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने अपना नाम और अन्य विवरण बदलकर कई बार यूपीएससी परीक्षा दी।

2017 में मनोज सोनी केंद्रीय लोक सेवा आयोग के संवैधानिक बोर्ड के सदस्य बने।उन्हें 16 मई 2023 को लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन केंद्रीय लोक सेवा आयोग द्वारा ही किया जाता है। साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसे उच्च अधिकारियों का चयन करने का काम केंद्रीय लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाता है।

सूत्रों के मुताबिक, मनोज सोनी ने एक महीने पहले राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया था|उनका इस्तीफा स्वीकार हुआ या नहीं? हालांकि, इस संबंध में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है|यूपीएससी में शामिल होने से पहले, मनोज सोनी ने गुजरात में दो विश्वविद्यालयों के कुलपति के रूप में कार्य किया।

यूपीएससी की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान पूजा खेडकर के धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फर्जी आईएएस अधिकारियों के कई मामले सामने आए|यह आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों ने यूपीएससी परीक्षा में लाभ पाने के लिए ओबीसी और आर्थिक रूप से पिछड़े श्रेणियों का फायदा उठाया। यह भी कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारियों ने फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र देकर यूपीएससी को गुमराह किया है|इसलिए यूपीएससी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया गया|

कौन हैं मनोज सोनी?: 59 वर्षीय मनोज सोनी राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञ माने जाते हैं।वह अंतरराष्ट्रीय संबंधों का भी अध्ययन करते हैं।उन्होंने 1991 से 2016 तक सरदार पटेल विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय संबंध पढ़ाया।उन्होंने 2009 से 2015 तक बाबासाहेब अम्बेडकर मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य किया।यही नहीं डॉ. मनोज सोनी 2005 से 2008 तक बड़ौदा में महाराजा सयाजी राजे विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी काम किया।

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