भारत में शायद कम लोगों को यह याद होगा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मथुरा सीट पर हेमा मालिनी का मुकाबला एक अन्य हेमा मालिनी से हुआ था। इसी तरह, 2019 के लोकसभा चुनाव में वायनाड सीट पर राहुल गांधी के सामने एक अन्य राहुल गांधी और यहां तक कि एक ‘राघुल गांधी’ नाम का उम्मीदवार भी मैदान में था, लेकिन अब ऐसा ही एक मामला अमेरिका के सुदूर राज्य अलास्का में सामने आया है जिसने महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से पहले राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
लगभग सभी जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक, तीन नवंबर को होने वाले प्रतिनिधि सभा और सीनेट के चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी देशभर में डेमोक्रेटिक पार्टी से पिछड़ रही है। कांग्रेस के इन दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को अलास्का जैसे उसके मजबूत गढ़ों में भी कड़ी चुनौती मिल रही है। अमेरिकी मुख्य भूभाग से अलग स्थित अलास्का में सीनेट चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और मौजूदा सांसद डेनियल सुलिवन का मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार मैरी पेल्टोला से है।
मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। चुनाव मैदान में एक तीसरा उम्मीदवार भी है, जिनका नाम डेनियल सुलिवन ही है। वह सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक हैं। हालांकि, शुरुआत में इसे कोई बड़ी बात नहीं माना गया, लेकिन बुधवार को न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खबर ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया। खबर में दावा किया गया कि शिक्षक सुलिवन की उम्मीदवारी पेल्टोला की टीम के सुनियोजित प्रयासों का नतीजा है।
इसके तुरंत बाद ट्रंप ने इसे चुनावी धोखाधड़ी करार देते हुए हंगामा खड़ा कर दिया और न्याय विभाग को मामले की जांच के आदेश दे दिए। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि अलास्का के डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेनियल सुलिवन के वोट काटने के लिए जानबूझकर उन्हीं के नाम वाले एक ‘डमी’ उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा, ताकि मतदाता भ्रमित हों और रिपब्लिकन उम्मीदवार को मिलने वाले वोट बंट जाएं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘यह उच्चतम स्तर की चुनावी धोखाधड़ी है… हमारे चुनावों में इस तरह के कृत्य की अनुमति नहीं दी जा सकती।’ उन्होंने पेल्टोला का नाम मतपत्र से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग भी की।
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