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Sunday, January 4, 2026
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उत्तराखंड: दंगाइयों को देना होगा पाई पाई का हिसाब !

पिछले साल बनभूलपुरा में हुई हिंसक घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कानून को लाने पर टिप्पणी की थी।

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उत्तराखंड में अब दंगा और आंदोलन करने वालों पर कड़ी कारवाई की जाएगी, इसके लिए सख्त कानून लागू कर किया गया है। दंगों और आंदोलनों के दौरान हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई दोषियों से की जाएगी। उत्तराखंड के राज्यपाल की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने इस संबंध में नया कानून लागू किया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कानून जरूरी है।

देवभूमि उत्तराखंड में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कर दिया है कि शांति और सुव्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कारवाई की जाएगी। भविष्य में अप्रिय घटनाएं न हों इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। साथ ही पुष्कर सिंह धामी ने ‘उत्तराखंड लोक (सरकारी) तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली (अध्यादेश) कानून , 2024’ पारित करने के लिए राज्यपाल को धन्यवाद दिया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, ”इस कानून के तहत दंगाइयों द्वारा सरकारी और निजी संपत्ति को पहुंचाए गए नुकसान की भरपाई की जाएगी। इसके साथ ही दंगा नियंत्रण और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर हुए खर्च की भी भरपाई की जाएगी.देवभूमि उत्तराखंड में कानून, व्यवस्था और राज्य के मूल स्वरूप को बाधित करने की इजाजत किसी को नहीं है। इस कानून को राज्य में सख्ती से लागू किया जाएगा।”

दंगों या आंदोलन के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से कानून तहत सख्ती से निपटा जाएगा, जिसमें जुर्माना और कारावास शामिल है। इसके अलावा दंगा नियंत्रण पर होने वाले सरकारी खर्च का भुगतान भी दंगाइयों को ही करना होगा। सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर आठ लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और दंगाइयों से मुआवजा वसूला जाएगा। बंद और हड़ताल के दौरान संपत्ति की क्षति होने पर आयोजक नेता भी जिम्मेदार होंगे। दंगाइयों से वसूली के साथ-साथ दंगा नियंत्रण का खर्च भी देना होगा।

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धामी सरकार ने इस साल के अगस्त में सत्र के दौरान सदन में विधेयक पेश किया था और इसे विधानसभा में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था। पिछले साल बनभूलपुरा में हुई हिंसक घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कानून को लाने पर टिप्पणी की थी। इसके मुताबिक उन्होंने इसे विधानसभा के सत्र में पेश किया और अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून में तब्दील हो गया है.

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