उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से मध्य प्रदेश में सुविधाएं बढ़ेंगी, विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने अपने संबोधन में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई भारत की सांस्कृतिक विरासत की महान संरक्षक थीं। 250-300 साल पहले, जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, तब उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित देशभर के मंदिरों और तीर्थ स्थलों का पुनर्निर्माण कराया। यह उनके दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति का प्रतीक है। काशी विश्वनाथ मंदिर में आज उनकी मूर्ति स्थापित है, जो उनकी विरासत को दर्शाता है।”
उन्होंने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई ने प्रभु सेवा और जनसेवा को कभी अलग नहीं माना। वे हमेशा शिवलिंग अपने साथ रखती थीं और चुनौतीपूर्ण समय में भी अपने राज्य को समृद्धि को नई दिशा दी। उनकी सोच थी कि शासन का अर्थ जनता की सेवा करना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है। आज शुरू की गई परियोजनाएं उनकी इस सोच को साकार करती हैं।”
इन परियोजनाओं में इंदौर मेट्रो की शुरुआत और दतिया व सतना को हवाई सेवा से जोड़ना शामिल है। उन्होंने कहा कि ये कदम मध्य प्रदेश के विकास को नई गति देंगे। आज का दिन 140 करोड़ भारतीयों के लिए प्रेरणा का अवसर है। लोकमाता की 300वीं जन्मजयंती हमें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मातृशक्ति को नमन करते हुए कहा, “मैं मां भारती और देश की माताओं, बहनों और बेटियों को प्रणाम करता हूं। आज यहां इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें-बेटियां हमें आशीर्वाद देने आई हैं। उनके दर्शन से मैं धन्य महसूस कर रहा हूं।”
उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उस दौर में, जब देश पर संकट मंडरा रहा था, न केवल धार्मिक स्थलों का संरक्षण किया, बल्कि अपने शासनकाल में जनता के कल्याण के लिए कई कार्य किए। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व आज भी प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी विरासत को संजोना और उनके आदर्शों पर चलना हम सभी का कर्तव्य है।
उन्होंने मध्य प्रदेश की जनता को इन विकास कार्यों के लिए बधाई दी और कहा कि यह राज्य के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और कहा कि उनकी तरह हमें भी समाज और देश की सेवा के लिए समर्पित रहना चाहिए।
उन्होंने पहलगाम हमले पर कहा, “पहलगाम में आतंकियों ने केवल भारतीयों का खून ही नहीं बहाया, उन्होंने हमारी संस्कृति पर प्रहार करने की कोशिश की। उन्होंने हमारे समाज को बांटने की कोशिश की। आतंकवादियों ने भारत की नारी शक्ति को चुनौती दी है। ये चुनौती आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए काल बन गई है।
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