पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में अब तक का सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत दर्ज

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में अब तक का सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत दर्ज

West Bengal and Tamil Nadu both recorded the highest ever voting percentage.

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के तहत हुए मतदान में दोनों राज्यों ने अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया है। चुनाव आयोग के अनुसार, तमिलनाडु में 85.13 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 92.59 प्रतिशत मतदान हुआ, जो स्वतंत्रता के बाद का सर्वाधिक आंकड़ा है।

इससे पहले तमिलनाडु में सबसे अधिक मतदान वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में 78.3 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जबकि पश्चिम बंगाल में 2011 में 84.7 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार दोनों राज्यों में इन रिकॉर्ड्स को पार कर दिया गया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रिकॉर्ड मतदान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आज़ादी के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अब तक का सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत – ECI पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हर वोटर को सलाम करता है।”

तमिलनाडु में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय रहा, जहां द्रविड़ मुनेत्र कळघम के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव एलायंस,AIDMK गठबंधन और अभिनेता जोसफ विजय के राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच मुकाबला देखा गया। डीएमके ने अपने चुनाव प्रचार में द्रविड़ मॉडल  और कल्याणकारी योजनाओं को प्रमुखता दी, जबकि AIDMK और भाजपा ने  भ्रष्टाचार मुक्त शासन और वंशवाद को खत्म करने का वादा किया है।

तमिलनाडु में बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को लेकर एआईएडीएमके नेता कोवई सत्यन ने कहा,“यह DMK के अंत का संकेत है। लोगों ने अपना जनादेश दिया है। हम कह रहे हैं कि ज़मीन पर बहुत ज़्यादा एंटी-इनकंबेंसी है, और लोग चुनावों में इसे ज़रूर दिखाएंगे, और उन्होंने दिखाया भी है।”

उधर, पश्चिम बंगाल में मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। राज्य में चुनाव से जुड़ी हिंसा के मामलों में 41 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 571 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। विभिन्न इलाकों में पुलिस कार्रवाई देखने को मिली, जिसमें नौदा, कुमारगंज, मुरारई, सैंथिया और दुबराजपुर जैसे क्षेत्रों में गिरफ्तारियां हुईं। पश्चिम बंगाल में चुनाव का दूसरा चरण 29 अप्रैल को प्रस्तावित है, जबकि दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

उच्च मतदान प्रतिशत को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों की बढ़ती भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इसके राजनीतिक परिणाम क्या होंगे, यह मतगणना के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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