भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को “हेल होल ऑन द प्लानेट” अर्थात नर्क के सामान तुलना करने वाली पोस्ट को साझा करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार(23 अप्रैल) को इन टिप्पणियों को अज्ञानपूर्ण, अनुचित बताया और कहा कि यह भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को नहीं दर्शाता।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा,“हमने कमेंट्स देखे हैं, और जवाब में US एम्बेसी का बाद में जारी किया गया स्टेटमेंट भी। ये कमेंट्स साफ़ तौर पर बिना जानकारी के, गलत और खराब टेस्ट वाले हैं। ये निश्चित रूप से भारत-संयुक्त राज्य रिश्ते की असलियत को नहीं दिखाते, जो लंबे समय से आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहे हैं।”
दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अमेरिकी रेडियो होस्ट माइकल सावेज की एक पोस्ट को रीपोस्ट किया। इस पोस्ट में भारत और चीन जैसे देशों को “हेल होल ऑन द प्लानेट” कहा गया था और अमेरिकी नागरिकता कानून की आलोचना की गई थी।
सावेज ने अपने पॉडकास्ट में दावा किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलने वाली नागरिकता का दुरुपयोग किया जाता है और इससे भारत व चीन जैसे देशों के लोग अपने परिवारों को अमेरिका लाने में सक्षम हो जाते हैं। उनके बयान में कहा गया, “यहां एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वे अपने पूरे परिवार को चीन, या भारत या धरती पर किसी अन्य नरक से ले आते हैं।”
इस विवाद के बाद अमेरिकी दूतावास ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति ने कहा है कि भारत एक महान देश है और इसके शीर्ष पर मेरा एक बहुत अच्छा मित्र है।’
इस बीच, वॉशिंगटन में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की और कहा कि ऐसे समय में जब अमेरिका ईरान के साथ तनावपूर्ण स्थिति में है, राष्ट्रपति का इस तरह की नस्लवादी घृणा को बढ़ावा देना अनुचित है।
देश के भीतर भी इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि “मोदी जी के प्यारे दोस्त, ‘नमस्ते ट्रंप’ ने एक नोट शेयर किया है जिसमें भारत को गाली दी गई है और बहुत ही अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया गया है। मोदी जी इन बेतुकी बातों पर बिल्कुल चुप हैं।”
खड़गे ने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री इस “अपमान” पर प्रतिक्रिया देंगे और भारत सरकार इस मुद्दे को अमेरिका के समक्ष उच्च स्तर पर उठाएगी या नहीं।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। जनवरी 2025 में जारी एक कार्यकारी आदेश के तहत अवैध या अस्थायी रूप से रह रहे प्रवासियों के बच्चों को स्वतः नागरिकता देने पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी, जिसे कई अदालतों ने असंवैधानिक बताते हुए रोक दिया है।
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