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पश्चिम बंगाल: मुस्लिम-बहुल मुर्शिदाबाद में महिला पत्रकार पर भीड़ का हमला और यौन उत्पीड़न

पुलिस की मौजूदगी के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं

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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के मुस्लिम-बहुल बेलडांगा गांव में शुक्रवार (16 जनवरी) को एक महिला पत्रकार पर भीड़ द्वारा हमला किया गया और यौन उत्पीड़न की गंभीर घटना सामने आई है। पीड़िता सोमा मैती झी २४ घंटा न्यूज के लिए कार्यरत हैं, रिपोर्टिंग के दौरान हिंसक भीड़ का शिकार हुईं। इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था, पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेलडांगा गांव में एक प्रवासी मजदूर की मौत को लेकर तनावपूर्ण माहौल था। इसी सिलसिले में सोमा मैती अपने एक फोटो-जर्नलिस्ट सहकर्मी के साथ मौके पर रिपोर्टिंग के लिए पहुंची थीं। तभी कथित तौर पर गुस्साई भीड़ ने पत्रकारों को निशाना बना लिया और उन पर अचानक हमला कर दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक, सोमा मैती को सड़क पर ही मुक्कों, थप्पड़ों और लातों से पीटा गया, साथ ही उनके साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसा भयावह अपराध भी किया गया। हमलावरों ने उनके कपड़े खींचे और बाल पकड़कर घसीटने की कोशिश की। जब वह जान बचाकर भागने लगीं, तो भीड़ ने उनका पीछा भी किया।

इस हिंसक घटना में केवल सोमा मैती ही नहीं, बल्कि विभिन्न मीडिया संस्थानों के कुल 12 पत्रकार और कर्मचारी भी भीड़ के हमले में घायल हुए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इलाके में पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद हमलावरों को रोकने में प्रशासन नाकाम रहा और स्थिति को तत्काल नियंत्रण में नहीं लिया जा सका।

हमले के बाद सोमा मैती को इलाज के लिए पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं वहां काम करने गई थी, लेकिन जिस तरह से मुझे पीटा गया, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। अपने पत्रकारिता के इतने वर्षों में मैंने कभी इतना भयावह अनुभव नहीं किया। दो लोग मेरे पैर पकड़ रहे थे, एक मेरे बाल खींच रहा था और दूसरा मेरे कपड़े खींच रहा था।”

इस घटना पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बयान जारी कर इसे ‘प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला’ बताते हुए कथित तौर पर निंदा की है। हालांकि, घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं किया गया, जिसे लेकर तीखी आलोचना हो रही है।

वहीं, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मामले में राज्य सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि यदि पुलिस की मौजूदगी में पत्रकारों पर हमला हो सकता है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह घटना न केवल महिला पत्रकारों की सुरक्षा बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बढ़ते हमलों को भी उजागर करती है। फिलहाल, पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी को लेकर स्थिति पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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