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Friday, March 6, 2026
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हिंदी बोलने में क्या दिक्कत, जब अधिकारी की सीएम नीतीश ने लगा दी क्लास।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य के किसानों के साथ संवाद किया और कृषि रोडमैप पर किसानों से राय जानी।

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बिहार सरकार की ओर से मंगलवार को पटना में किसानों के लिए एक समागम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अंग्रेजी में बात करने वाले किसान से काफी नाराज नजर आए। उन्होंने किसान से कहा, “यह इंग्लैंड नहीं भारत है, हिंदी में बोलो।”

बता दें कि बिहार सरकार जल्द ही राज्य में कृषि रोड मैप लागू करेगी। साल 2008 में नीतीश कुमार ने बिहार में किसानों की बेहतरी के लिए कृषि रोड मैप की शुरुआत की थी। 2023 से 2028 तक के लिए चौथी बार कृषि रोड मैप तैयार किया जा रहा है। वहीं इससे पहले बिहार सरकार ने इस संबंध में किसानों के विचार जानने के लिए मंगलवार को किसान सभा का आयोजन किया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई विभागों के मंत्री और अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

वहीं किसानों को खेती के बारे में जानकारी देते हुए लखीसराय के किसान अमित कुमार हिंदी-अंग्रेजी के शब्दों को मिलाकर बोल रहे थे। अमित कुमार लखीसराय के रहने वाले है। वो पिछले 17 सालों से पुणे में थे, उन्होंने पुणे से एमबीए किया है। लगभग 4 साल जॉब भी किया है। कोरोना के समय बिहार वर्क फ्रॉम होम में आए थे। उसके बाद बिहार सरकार की कृषि पॉलिसी ने उन्हें प्रभावित किया। वहीं बिहार सरकार के तरफ से जो प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं, उसमें उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया। 30 लोगों के बीच में इकलौते वह सदस्य हैं, जो मशरूम उत्पादन में आगे हैं। अमित कुमार ने ‘मुफ्त बिजली’ की जगह ‘बिजली फ्री’ देने की बात कही तो ‘फ्री’ शब्द पर मुख्यमंत्री भड़क गए। उन्होंने कहा कि ‘मुफ्त’ बोलिए।

उन्होंने कहा, ”अँग्रेज़ी में क्यों बोल रहे हो?” यह इंग्लैंड नहीं, भारत है, आपको हिंदी में बात करनी चाहिए। जो किसान यहां आया है वह एक सामान्य परिवार से है, वे अंग्रेजी कैसे समझ सकते हैं?” “कोरोना के बाद से लोग अपनी मातृभाषा और राज्य की भाषा को भूल रहे हैं। हर कोई अंग्रेजी का प्रयोग कर रहा है। जहां भी अंग्रेजी की जरूरत हो, इसका इस्तेमाल किया जाए। हालांकि यहां कृषि की चर्चा अंग्रेजी में नहीं बल्कि अपनी मातृभाषा में होनी चाहिए।

नीतीश कुमार यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा- वह भी अंग्रेजी मीडियम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं, लेकिन देश में जहां भी जाते हैं। वहां की स्थानीय भाषा को सीखने की कोशिश करते हैं। बिहार में जहां भी जाते हैं, लोगों की भाषा हिंदी है। उसी में संवाद करते हैं। यह क्या हो रहा है कि भाषण में हिंदी-अंग्रेजी मिक्स किया जा रहा है। अंग्रेजी बोलनी है तो अंग्रेजी बोलें, हिंदी बोलनी है तो हिंदी बोलें। दोनों को मिक्स ना करें, जो चीजें मौलिक है, उसे मौलिक रखें।

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