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मामा और पिता के नक्शेकदम पर चलकर इतिहास दोहराएंगे सत्यजीत तांबे?

सत्यजीत तांबे ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।

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कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो पहले मामा बालासाहेब थोराट और फिर पिता सुधीर तांबे ने निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी काबिलियत साबित की। अब सत्यजीत तांबे भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। सत्यजीत तांबे नासिक स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा और अघाडी के समर्थन के बिना चुनाव लड़ सकते हैं। बुधवार को कांग्रेस पार्टी की बैठक, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले सत्यजीत तांबे को समर्थन देने का ऐलान करेंगे, इस पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि, सत्यजीत ने निर्दलीय चुनाव लड़कर खुद को साबित करने की ठान ली है और जोर-शोर से चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। मामा बालासाहेब थोराट और पिता डॉ. सुधीर तांबे के नक्शेकदम पर चलते हुए सत्यजीत तांबे खुद को साबित करने के लिए पूरी ताकत से चुनाव का सामना कर रहे हैं।

वर्ष 1985 में बालासाहेब थोराट के पिता एक वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी थे। भाऊसाहेब उस समय कांग्रेस में थे। उस समय कांग्रेस पार्टी द्वारा बालासाहेब थोराट को विधायक टिकट से वंचित कर दिया गया था, इसलिए उन्होंने कांग्रेस विरोधी रुख अपनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद के दौर में कांग्रेस पार्टी को उनका ध्यान रखना पड़ा और अब तक कांग्रेस से बालासाहेब थोराट आठ बार निर्वाचित हो चुके हैं।

बालासाहेब थोराट के साले और सत्यजीत के पिता सुधीर तांबे के साथ फिर से ऐसा ही वाकया हुआ। जब वर्ष 2009 में सुधीर तांबे ने नासिक स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने अगले दो चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़े और बड़े अंतर से जीत हासिल की। वहीं अब फिर से बालासाहेब थोराट के भांजे सत्यजीत तांबे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है।

दरअसल यूथ कांग्रेस के जरिए पिछले 22 साल से पार्टी के विकास के लिए काम कर रहे सत्यजीत तांबे की उपेक्षा की गई। विधायक सुधीर तांबे ने बेटे के राजनीतिक भविष्य को लेकर सत्यजीत तांबे के खिलाफ निर्दलीय अर्जी दाखिल की है। सुधीर तांबे ने विश्वास व्यक्त किया है कि उनके पुत्र सत्यजीत तांबे निर्वाचन क्षेत्र में अपने जनसंपर्क और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण बिना किसी पार्टी की मदद के निर्दलीय विधायक बन सकते हैं। वहीं अगर नासिक स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी की ताकत पर नजर डालें तो सुधीर तांबे का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। अहमदनगर के राजनीतिक विश्लेषकों ने भविष्यवाणी की है कि सत्यजीत तांबे निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत सकते हैं, भले ही गठबंधन और भाजपा ने उनका समर्थन नहीं किया हो।

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