मुंबई उच्च न्यायालय ने हास्य-व्यंगकार भारती सिंह और अभिनेता शेखर सुमन को बड़ी राहत दी है। वर्ष 2010 में दर्ज की गई FIR को रद्द करने का आदेश अदालत ने दिया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हास्य, व्यंग्य और तुकबंदी के उद्देश्य से की गई टिप्पणी के पीछे किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं होता।
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि जिन शब्दों (या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!) को आपत्तिजनक बताया गया है, वे केवल तुकबंदी और हास्य के लिए उपयोग किए गए थे, जैसा कि याचिकाकर्ताओं का कहना है। अदालत ने कहा कि ‘दही भल्ला’ और ‘रसगुल्ला’ ऐसे सामान्य खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें सभी समुदायों के लोग खाते हैं।
इस पर याचिकाकर्ताओं का तर्क निर्विवाद है। इन शब्दों का कोई धार्मिक संदर्भ नहीं है और इस तर्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसी हास्य रचना में केवल खाद्य पदार्थों का उल्लेख करना मज़हब का अपमान नहीं माना जा सकता। यह साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक है कि इन शब्दों का उपयोग अपमान करने के उद्देश्य से किया गया था।
अदालत ने यह भी माना कि कलाकारों तक आसानी से पहुंच होने के कारण उन्हें निशाना बनाना आसान हो गया है, लेकिन आपराधिक कानून का दुरुपयोग करना भी गलत है। अदालत ने आगे कहा कि यह कार्यक्रम एक पारिवारिक मनोरंजन शो के रूप में प्रसारित हो रहा था और काफी समय से चल रहा था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ऐसे कार्यक्रमों में कलाकारों और जजों का उद्देश्य केवल हास्य उत्पन्न करना होता है।
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के साथ धारा 295-ए के तहत दंडनीय अपराध के लिए पायधोनी पुलिस थाने में 27 नवंबर 2010 को दर्ज FIR और उससे संबंधित सभी कार्यवाहियों को रद्द और निरस्त किया जाता है।
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