पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। राज्य में पहली बार 90 प्रतिशत से अधिक मतदान किया गया है। हालांकि विपक्षी भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को चुनाव नतीजे परेशान नहीं कर रहे उससे अधिक बांग्लादेश में चिंता दिख रही है। बांग्लादेश के एक सांसद द्वारा संभावित चुनाव परिणामों पर देश की लोकसभा में चिंता जताई है। बांग्लादेश में डर है की भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल में सत्ता में आते ही बड़ी संख्या बांग्लादेशी घुसपैठियों को उठाकर वापस बांग्लादेश में पटक दिया जाएगा, जो बांग्लादेश के लिए अच्छी स्थिती नहीं होगी।
रंगपुर से नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के सांसद अख्तर हुसैन ने बांग्लादेश की संसद में बयान देते हुए कहा कि यदि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में आती है, तो इससे शरणार्थी संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा, “अगर एग्जिट पोल में बीजेपी की जीत दिखती है और वे सरकार बनाते हैं, तो वे अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेज सकते हैं। इससे हमारे लिए मानवीय, आर्थिक और शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है।” उनकी यह टिप्पणी भारत में घुसपैठ कर चुके बांग्लादेशी मुसलमानों को लेकर है, जिनके संभावित सीमा पार भेजे जाने को लेकर उन्हें डर लग रहा है।
इसी बीच, बांग्लादेश सरकार ने गुरुवार (30 अप्रैल)को ढाका स्थित भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया। विदेश मंत्रालय में हुई इस बैठक के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हालिया बयान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। बांग्लादेशी अधिकारियों ने इन टिप्पणियों को अनुचि और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक बताया।
दरअसल आसाम के मुख्यमंत्री द्वारा 15 अप्रैल को दिए गए एक साक्षात्कार के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर विवादास्पद टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कहा था, “मैं रोज सुबह भगवान से प्रार्थना करता हूं कि यूनुस के समय जैसी स्थिति बनी रहे और संबंध बेहतर न हों।” उन्होंने यह भी कहा, “जब भारत और बांग्लादेश के संबंध बेहतर होते हैं, तब अवैध प्रवासियों को वापस भेजना मुश्किल हो जाता है। इसलिए आसाम के लोग दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध को प्राथमिकता देते हैं।”
सरमा ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बांग्लादेश सीमा रक्षक (BGB) के बीच समन्वय को लेकर भी टिप्पणी की और दावा किया कि कई बार सीमा पर मौजूद परिस्थितियों के चलते लोगों को जबरन पार भेजा जाता है।
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