धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने पिंडदान और हवन-यज्ञ के माध्यम से अपने पितरों का स्मरण किया तथा उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की। मान्यता है कि पितृपक्ष में पूर्वजों के निमित्त किए गए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान से पितरों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
उल्लेखनीय है कि 26 सितंबर से शुरू हुआ पितृपक्ष 10 अक्टूबर को अमावस्या तिथि पर पितृविसर्जन के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए धार्मिक परंपराओं का पालन किया।
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि श्री गायत्री धाम, मुंबई की ओर से गायत्री परिवार युवा प्रज्ञा मंडल ट्रस्ट के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए तर्पण और पिंडदान से संबंधित आवश्यक पूजन सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिससे सभी श्रद्धालु सुविधापूर्वक अनुष्ठान कर सके।
शिवनगर में आयोजित कार्यक्रम का समापन गायत्री हवन-यज्ञ के साथ हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने तथा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होने की कामना की गई। आयोजन के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा को आगे बढ़ाया गया।
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