पूजा-पाठ करने और भगवान को प्रसन्न करने के कुछ नियम-कायदे होते है जिनका पालन करने से घर में संपन्नता बनी रहती है। पूजा में जप करते समय पूरे विधि-विधान का ध्यान रखना जरूरी होता है। पूरी क्रिया और श्रद्धा के साथ किया गया जप शुभ फल देना वाला होता है। पुराणों में जप से संबंधित कई बातें बताई गई हैं, जिनका ध्यान हर किसी को रखना ही चाहिए।
देवी-देवताओं का जप करते समय मनुष्य को अपनी छींक या खांसी पर नियंत्रण रखना चाहिए। भगवान का ध्यान करते समय छींकने से मुंह अपवित्र हो जाता है और अपवित्र मुंह से भगवान का नाम लेना वर्जित माना जाता है। अगर भगवान का जप करते समय छींक या खांसी आ जाए तो तुरंत हाथ-मुंह धोकर, पवित्र हो जाना चाहिए और उसके बाद ही जप दोबारा शुरू करना चाहिए।
थूक के द्वारा मनुष्य अपने शरीर की गदंगी को बाहर करता है। देवी-देवताओं का ध्यान या जप करते समय ऐसी कोई भी क्रिया करना वर्जित माना गया है। मनुष्य को अपने मन के साथ-साथ शरीर को भी पूरी तरह से शुद्ध करने के बाद ही भगवान की पूजा-अर्चना करना चाहिए। यदि पूजा या ध्यान के बीच में शरीर संबंधी कोई भी क्रिया करनी पड़े तो फिर से नहाने के बाद ही देव-पूजा करनी चाहिए।
उबासी लेना आलस्य की निशानी होती है। जो मनुष्य सुबह उठने के बाद भी उबासी लेता रहता है या नींद की अवस्था में रहता है, उसे भगवान की पूजा-अर्चना करने की मनाही है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, सुबह जल्दी उठ कर, स्नान आदि काम पूरे करके, आलस-नींद जैसे भावों को मन से दूर करके ही भगवान का ध्यान या जप करना चाहिए।
पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
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