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Tuesday, March 17, 2026
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प. पू. सरसंघचालक का आर्थिक और सामाजिक विकास पर जोर, पर्यावरण संरक्षण पर दिए सुझाव!

स्वयंसेवकों और समाज के लोगों से आह्वान है की वे सक्रिय सामाजिक जागरूकता फैलाएं और स्वयं उदाहरण बनकर नेतृत्व करें।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर नागपुर मुख्यालय में अपने उद्बोधन के दौरान देश के आर्थिक और सामाजिक विकास पर जोर दिया और पर्यावरण संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि आज देश जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें पर्यावरण का क्षरण, प्रकृति का प्रकोप, परिवार और समाज में टूटन तथा नागरिक जीवन में बढ़ता अनाचार और अत्याचार गंभीर समस्या बन चुके हैं। इनसे निपटने के लिए एक नए और टिकाऊ आर्थिक मॉडल की आवश्यकता है।

डॉ. भागवत ने कहा, “दुनिया परस्पर निर्भरता पर चलती है, लेकिन इसके साथ-साथ हमें समझना होगा कि स्वदेशी और स्वावलंबन का कोई विकल्प नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता को आर्थिक नीति का केंद्र बिंदु बनाना होगा।सरसंघचालक ने कहा कि विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे धर्म आधारित समग्र और एकात्म दृष्टि पर आधारित होना चाहिए। यह मॉडल सभी धार्मिक उपासना पद्धतियों से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने वाला होना चाहिए। उन्होंने बताया कि खासकर नई पीढ़ी में देशभक्ति और संस्कृति के प्रति आस्था बढ़ रही है। समाज के विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठन, साथ ही संघ के स्वयंसेवक, अभावग्रस्त वर्गों की सेवा में जुटे हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप समाज स्वयं सक्षम हो रहा है और अपनी पहल से समस्याओं का समाधान निकाल रहा है।

भागवत ने कहा कि संघ के अनुभव से यह स्पष्ट है कि समाज में अब प्रत्यक्ष भागीदारी की इच्छा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने स्वयंसेवकों और समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे सक्रिय सामाजिक जागरूकता फैलाएं और स्वयं उदाहरण बनकर नेतृत्व करें।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत को अपनी समग्र और एकात्म दृष्टि के आधार पर विकास का रास्ता तैयार करना होगा और विश्व के सामने एक सफल उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि “अर्थ और काम के पीछे अंधाधुंध भाग रही दुनिया को पूजा, रीति-रिवाज और धार्मिक संस्कारों से ऊपर उठकर ऐसा मार्ग दिखाना होगा, जो सबको साथ लेकर चले और सभी की एक साथ उन्नति सुनिश्चित करे।”

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