ऑस्ट्रेलिया के वर्षावनों में मिला दुनिया का सबसे भारी कीट?

ऑस्ट्रेलिया के वर्षावनों में मिला दुनिया का सबसे भारी कीट?

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ऑस्ट्रेलिया के रहस्यमयी वर्षावनों ने एक और अद्भुत जीव का राज़ खोला है। वैज्ञानिकों ने देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से क्वींसलैंड के ऊंचे वर्षावनों में एक अब तक अज्ञात विशाल स्टिक इंसेक्ट की खोज की है, जिसे Acrophylla alta नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह कीट ऑस्ट्रेलिया का अब तक का सबसे भारी कीट हो सकता है।

यह दुर्लभ कीट ऑस्ट्रेलिया के अथर्टन टेबललैंड्स क्षेत्र में समुद्र तल से 900 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर पाए गए कोहरे से ढके वर्षावन की छतरी में मिला। इस प्रजाति की खोज जेम्स कुक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंगस एमॉट और कीट विज्ञानी रॉस कूपलैंड ने की। उनकी खोज तब शुरू हुई जब उन्हें एक विशाल स्टिक इंसेक्ट की तस्वीर मिली, जो किसी ज्ञात प्रजाति से मेल नहीं खा रही थी। उत्सुकता से प्रेरित होकर दोनों शोधकर्ता वेट ट्रॉपिक्स वर्ल्ड हेरिटेज क्षेत्र में पहुंचे, जहां उन्होंने इस अनोखी प्रजाति की एक मादा को खोजा।

इस नए कीट का नाम Acrophylla alta इसके ऊंचाई वाले निवास स्थान के आधार पर रखा गया है, जिसमें “alta” लैटिन में “ऊंचा” का अर्थ रखता है। अभी तक इस प्रजाति की केवल दो मादाएं पाई गई हैं। इनमें से एक को एक स्थानीय बगीचे में पाया गया और छोड़ने से पहले तौला गया—इसका वजन 44 ग्राम था। तुलना करें तो ऑस्ट्रेलिया का अब तक का सबसे भारी कीट, विशाल बिल खोदने वाला तिलचट्टा (Macropanesthia rhinoceros) केवल 30 से 35 ग्राम के बीच होता है।

इस खोज को और भी रोचक बनाता है यह तथ्य कि वैज्ञानिक अब तक एक भी नर नहीं खोज पाए हैं। प्रोफेसर एमॉट का मानना है कि नर वर्षावन की ऊंची छतरी में रहते हैं और उन्हें देख पाना लगभग असंभव है, जब तक कि कोई तूफान या शिकारी उन्हें नीचे न ले आए। “आप वर्षों तक खोज करें और फिर भी एक न पाएं,” उन्होंने कहा।

यह शोध अब वैज्ञानिक जर्नल Zootaxa में प्रकाशित हो चुका है और यह इस ओर इशारा करता है कि ऑस्ट्रेलिया के प्राचीन वर्षावनों में आज भी कितनी अज्ञात जैव विविधता छिपी है। वेट ट्रॉपिक्स मैनेजमेंट अथॉरिटी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर पीटर वेलेंटाइन ने इस खोज को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि वर्षावन की छतरी अभी भी सबसे कम अध्ययन किए गए पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है।

संरक्षण विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस तरह की खोजें संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा के प्रयासों को मजबूती देंगी। प्रोफेसर एमॉट ने चेताया, “हो सकता है हम ऐसी प्रजातियों को खो रहे हों जिनके अस्तित्व का हमें अभी तक पता ही नहीं है।” इन कीटों का निवास कहां है और इनकी संख्या कितनी है, यह जानना इनके संरक्षण के लिए रणनीति तैयार करने में अहम साबित होगा।

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