इस विशेष अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष माननीय श्री राहुल नार्वेकर, कैबिनेट मंत्री एवं मलबार हिल विधानसभा क्षेत्र के विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा सहित महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अनेक गणमान्य व्यक्ति विशेष रूप से उपस्थित रहे।
महोत्सव की शुरुआत विशेष पूजन से हुई। इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष श्रीमती संध्या पुरेचा और सरफोजी राजे भोसले संस्था की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। यह कार्यक्रम श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर और माधवबाग चैरिटी के विश्वस्त मंडल की ओर से आयोजित किया गया था।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने 150 वर्षों से समाजसेवा में निरंतर कार्य कर रहे माधवबाग परिवार को बधाई दी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जब यह संस्था 200 वर्ष पूरे करे, तब यहां मातृभाषा का प्रशिक्षण केंद्र हो, गीता, उपनिषद और वेदों की शिक्षा मिले और स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध हों।
अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 11 वर्षों का कार्यकाल स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर कई वर्षों से लंबित ऐतिहासिक निर्णय इस कालखंड में लिए गए।
मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, और 2047 तक भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, इस पर पूरा विश्वास है। यह बदला हुआ भारत है, जो हमारी माताओं-बहनों की माँग का सिंदूर मिटानेवालों को उनके घर में घुसकर जवाब देता है। आज पूरी दुनिया को ‘सिंदूर’ शब्द का अर्थ और उसका महत्व समझ में आया है। ऑपरेशन सिंदूर के कारण हमारी माताओं-बहनों का सिर गर्व से ऊँचा हुआ है।”
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “माधवबाग श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर की स्थापना को आज 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, यह अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है। इस अवसर पर गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुझे भी यहां दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ, यह मेरे लिए अत्यंत आनंद का विषय है।
इस मंदिर में केवल भगवान की मूर्ति नहीं, बल्कि स्वयं उसका वास है। इसलिए यहां अखंड सेवा कार्य निरंतर चल रहा है। माधवबाग के माध्यम से गौसेवा, समाजसेवा और अन्य सहायता कार्यों में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई गई है। मैं उन सभी को नमन करता हूँ जिन्होंने इस सेवा में अमूल्य योगदान दिया है और माधवबाग परिवार को शुभकामनाएं देता हूँ।”
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर की 150वीं जयंती का यह महोत्सव केवल धार्मिक उत्सव न रहकर श्रद्धा, समाजसेवा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया। मुंबई के हृदयस्थल पर स्थित यह आस्था का केंद्र आनेवाली पीढ़ियों तक अपनी परंपरा और आध्यात्मिक प्रेरणा को बनाए रखेगा, ऐसा विश्वास इस अवसर पर सभी गणमान्यजनों ने व्यक्त किया।



