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“बांग्लादेशी घुसपैठिए वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे ममता बॅनर्जी को इसी बात का डर”

सुवेंदु अधिकारी का ममता पर हमला

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर एक नया विवाद छिड़ गया है। भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बॅनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे निर्वाचन आयोग (ECI) के नए दिशा-निर्देशों का इसलिए विरोध कर रही हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का उनका समर्पित वोट बैंक अब वोटर लिस्ट से हट सकता है।

शुक्रवार (27 जून) को बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “ममता बॅनर्जी को यह डर सता रहा है कि उनके तुष्टिकरण और अवैध प्रवासियों पर आधारित वोट बैंक की असलियत अब सामने आ जाएगी। जो घुसपैठिए रोहिंग्या पृष्ठभूमि वाले लोग भी शामिल हैं, अब मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, इसलिए मुख्यमंत्री बौखलाहट में आयोग पर हमले कर रही हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आधार और वोटर आईडी को जोड़ने की पहल का स्वागत करती है। “हम बायोमेट्रिक सत्यापन चाहते हैं ताकि फर्जी वोटिंग पर लगाम लगे।” अधिकारी ने जोड़ा।

गौरतलब है कि गुरुवार (25 जून)को मुख्यमंत्री ममता बॅनर्जी ने ECI के नए मतदाता संशोधन नियमों को लेकर आशंका जताई थी और कहा था कि ये नियम बंगाल को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की दिशा में एक कदम बताया और चेतावनी दी कि इससे लाखों लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री के इसी बयान पर भाजपा आईटी सेल प्रमुख और बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने पलटवार करते हुए कहा, “ममता बॅनर्जी क्यों घबरा रही हैं? क्या उन्हें इस बात की चिंता है कि उन्होंने वर्षों से अवैध घुसपैठियों और तुष्टिकरण के जरिए बनाया हुआ वोट बैंक अब जांच के दायरे में है?” मालवीय ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग की ये प्रक्रियाएं नियमित और वैधानिक हैं जिनका उद्देश्य चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना है।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में हाल ही की एक कार्रवाई भी है, जिसमें दक्षिण 24 परगना के न्यूटन दास नामक व्यक्ति का नाम भारत और बांग्लादेश दोनों की वोटर लिस्ट में पाया गया था। इसके बाद उसे भारत की सूची से हटा दिया गया। मालवीय ने कहा, “स्वच्छ मतदाता सूची एनआरसी नहीं है, यह चुनावी अखंडता है। जो लोग अवैध वोटों पर पलते हैं, उन्हें ही पारदर्शिता से डर लगता है।” इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच, बंगाल की जनता और प्रशासन की निगाहें अब निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। चुनावी साल में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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