गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने अंगदान के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 200वें अंगदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। इस भावनात्मक और प्रेरणादायक घटना ने पूरे राज्य में मानवता की मिसाल कायम कर दी। इस बार अंगदान करने वाले महेशभाई सोलंकी थे, जो अमरेली जिले के निवासी थे। 2 जुलाई को हुए एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 9 जुलाई को उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया, जिसके बाद उनके परिवार ने एक साहसिक और करुणामयी निर्णय लेते हुए अंगदान की स्वीकृति दी।
महेशभाई सोलंकी के हृदय, लीवर, अग्न्याशय और दोनों गुर्दे दान किए गए, जिनका प्रत्यारोपण जरूरतमंद मरीजों में किया गया और उन्हें नया जीवन मिला। सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने जानकारी दी कि बीते साढ़े चार वर्षों में अस्पताल ने 200 अंगदान की उपलब्धि प्राप्त की है, जिसके माध्यम से 657 अंगों का प्रत्यारोपण कर 638 लोगों को नया जीवन दिया जा चुका है। इन अंगों में 175 लीवर, 364 किडनी, 64 हृदय, 14 अग्न्याशय, 6 हाथ, 32 फेफड़े, 2 छोटी आंतें और 21 त्वचा प्रत्यारोपण शामिल हैं।
डॉ. जोशी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को टीमवर्क और मानवीय समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, “हर अंगदान सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह दो परिवारों के बीच संवेदना और जीवन की उम्मीद का पुल होता है। हम उन 200 परिवारों को नमन करते हैं जिन्होंने इस महान कार्य में सहयोग किया और सैकड़ों जानों को बचाया।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अस्पताल का लक्ष्य है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अंगों के अभाव में अपनी जान न गंवाए।
उल्लेखनीय है कि 2020 से अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने अंगदान को लेकर जनजागरूकता अभियान भी शुरू किया है, जिसका प्रभाव अब गुजरात से बाहर भारत के अन्य राज्यों और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों तक भी दिखाई दे रहा है। इस अभियान की वजह से लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है और अब अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य में भागीदारी कर रहे हैं।
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