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Sunday, July 5, 2026
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खूबसूरती ही नहीं, सेहत का भी है यह रामबाण इलाज: मधुमालती

पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और भोजन के बेहतर अवशोषण में मदद करता है।

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आमतौर पर घरों की दीवारों और बगीचों की शोभा बढ़ाने वाली मधुमालती (Rangoon Creeper) सिर्फ एक सुंदर लता नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में इसे एक औषधीय खजाना माना जाता है। गुलाबी, सफेद और लाल रंगों में खिलने वाला यह फूल न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि इसके औषधीय गुणों के चलते यह त्वचा रोग, सर्दी-जुकाम, पाचन समस्याएं, बुखार और यहां तक कि डायबिटीज जैसी बीमारियों से राहत दिलाने में भी उपयोगी है।

मधुमालती का बॉटेनिकल नाम ‘कॉम्ब्रेटम इंडिकम’ (Combretum indicum) है और यह ‘कैप्रीफोलिआसी’ परिवार से संबंधित है। इसकी लगभग 180 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 20 भारत में उपलब्ध हैं। भारत के अलावा यह फिलीपींस, मलेशिया, चीन, यूरोप और अमेरिका में भी पाई जाती है। रात के समय मधुमालती के फूल सफेद होते हैं, लेकिन जैसे ही सुबह सूरज की किरणें पड़ती हैं, वे गुलाबी और फिर गहरे लाल रंग में बदल जाते हैं। इसकी यह खासियत इसे नेचुरल PH इंडिकेटर की तरह भी दर्शाती है।

  • प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथ ‘रसजलनिधि’ के चतुर्थ खंड में मधुमालती के औषधीय गुणों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इसमें बताया गया है कि सर्दी-जुकाम और कफ की समस्या में यह अत्यंत लाभकारी होती है। तुलसी के पत्ते (1 ग्राम), 2-3 लौंग, मधुमालती के फूल (1 ग्राम) और इसके दो पत्तों से बना काढ़ा दिन में दो से तीन बार सेवन करने पर जुकाम व कफ में राहत मिलती है।
  • इसके अलावा, मधुमालती में मौजूद सूजन-रोधी गुण गठिया के दर्द और शरीर में आई सूजन को कम करने में भी प्रभावशाली साबित होते हैं। मधुमालती के 5-6 पत्तों या फूलों का रस निकालकर दिन में दो बार सेवन करने से डायबिटीज को नियंत्रण में रखने में सहायता मिल सकती है, क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को संतुलित करने में सहायक है।
  • इसके फूलों का उपयोग पाचन से जुड़ी समस्याओं जैसे अपच, गैस और पेट की जलन में भी किया जाता है, जिससे यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और भोजन के बेहतर अवशोषण में मदद करता है। इस प्रकार, मधुमालती न केवल एक सजावटी पौधा है, बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसका एक विशिष्ट स्थान है।

हालांकि मधुमालती के कई औषधीय फायदे हैं, फिर भी किसी भी रूप में इसे नियमित उपयोग में लेने से पहले आयुर्वेद विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह जरूर लें। विशेष रूप से यदि आप किसी पुरानी बीमारी या दवा के सेवन में हैं, तो स्वयं औषधि लेना नुकसानदेह हो सकता है।

मधुमालती न केवल आपके बगीचे को रंगों से भर देती है, बल्कि एक प्राकृतिक औषधालय के रूप में भी आपकी सेहत की रक्षा कर सकती है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के संगम से यह सिद्ध होता है कि प्राकृतिक चिकित्सा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां।

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