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Thursday, June 25, 2026
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रॉबर्ट वाड्रा पर चार्जशीट, लंदन संपत्ति जब्ती पर ईडी का बड़ा कदम!

ईडी की तरफ से इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने और संपत्तियों को अटैच किए जाने की खबरों के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

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केंद्रीय एजेंसी ने​ वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी की 37.64 करोड़ रुपये की 43 अचल संपत्तियां कुर्क कर लीं हैं। ईडी ने सांसद प्रियंका गांधी के पति वाड्रा के खिलाफ जमीन के लेनदेन में कथित धनशोधन से जुड़े एक मामले में चार्जशीट दायर की है। बताया गया है कि ईडी ने मामले में जांच पूरी करने के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शिकायत की थी।
इस मामले में वाड्रा की स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. के अलावा 11 और लोगों को आरोपी बनाया गया था। शुक्रवार को अदालत ने मामले में अपने रिकॉर्ड कीपर (अहलमद) से रिपोर्ट मांगी और मामले को दस्तावेज के सत्यापन के लिए सूचीबद्ध कर लिया।
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ईडी की तरफ से इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने और संपत्तियों को अटैच किए जाने की खबरों के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि केंद्र रॉबर्ट वाड्रा को परेशान कर रहा है। राहुल ने कहा कि अंत में जीत सच्चाई की होगी।

आरोप है कि मानेसर-शिकोहपुर में मौजूद जमीन के ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से वाड्रा की कंपनी को बेचे जाने के एक दिन बाद ही इसका म्यूटेशन कर दिया गया। इतना ही नहीं, इसके अगले दिन जमीन को वाड्रा की कंपनी को स्थानांतरित भी कर दिया गया। जबकि आमतौर पर इस प्रक्रिया में तीन महीने का समय लगता है।

हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने इस जमीन में से 2.70 एकड़ जमीन को कमर्शियल कॉलोनी के तौर पर डेवलप करने की इजाजत देते हुए रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को इसका लाइसेंस दिया था।

आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन की कीमत बढ़ गई। जून 2008 में वाड्रा से जुड़ी कंपनी ने ये जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ में बेच दी। यानी कुछ ही महीनों जमीन की कीमत 773 प्रतिशत तक बढ़ गई। आगे चलकर हुड्डा सरकार ने आवासीय परियोजना का लाइसेंस डीएलएफ को ट्रांसफर कर दिया।

इसके ठीक बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के आदेश पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया। हालांकि, खेमका ने अपनी जांच पूरी कर ली और 15 अक्तूबर को जमीन का म्यूटेशन रद्द कर दिया।

​ अक्तूबर 2012 में जब आईएएस अशोक खेमका (अब रिटायर्ड) हरियाणा में भूमि पंजीकरण और रिकॉर्ड विभाग में इंस्पेक्टर जनरल के पद पर तैनात हुए तो उन्होंने वाड्रा की जमीनों के समझौतों को खंगालना शुरू किया।
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