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Thursday, January 15, 2026
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भारत से एफटीए यूरोपीय संघ छोड़ने के बाद सबसे अहम: स्टार्मर!

उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन एफटीए से जीवन स्तर में सुधार होगा और मजदूर वर्ग की जेब में ज्यादा पैसा आएगा।

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भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बड़ा बयान दिया है। कीर स्टार्मर ने गुरुवार को इस समझौते को यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर निकलने के बाद से देश की ओर से किया गया सबसे बड़ा और आर्थिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता बताया।

उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन एफटीए से जीवन स्तर में सुधार होगा और मजदूर वर्ग की जेब में ज्यादा पैसा आएगा।

गुरुवार को लंदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रेस वक्तव्य देते हुए कीर स्टार्मर ने कहा कि एफटीए समझौता अत्याधुनिक विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत ब्रिटिश श्रमिकों, स्कॉटलैंड भर में व्हिस्की डिस्टिलर्स और लंदन, मैनचेस्टर और लीड्स में सेवा क्षेत्र के लिए अच्छा है, क्योंकि इससे ब्रिटेन में भारतीय वस्तुओं की कीमतें कम हो जाएंगी।

उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा समझौता है, जो हमारे दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा, वेतन में वृद्धि होगी, जीवन स्तर में सुधार होगा और श्रमिकों की जेब में अधिक पैसा आएगा। यह नौकरियों के लिए अच्छा है। यह व्यापार के लिए अच्छा है, टैरिफ में कटौती करेगा, व्यापार को सस्ता और आसान बनाएगा।

यह अत्याधुनिक विनिर्माण में लगे ब्रिटिश श्रमिकों, स्कॉटलैंड भर में व्हिस्की डिस्टिलर्स और लंदन, मैनचेस्टर और लीड्स में सेवा क्षेत्र के लिए अच्छा है। यह उपभोक्ताओं के लिए भी अच्छा है क्योंकि इससे यूनाइटेड किंगडम में कपड़े, जूते और भोजन जैसी भारतीय वस्तुओं की कीमतें कम होंगी और यह दीर्घकालिक लाभ प्रदान करेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में हर साल लगभग 4.8 अरब पाउंड, वेतन में 2.2 अरब पाउंड और ब्रिटेन के विभिन्न क्षेत्रों व देशों को करोड़ों पाउंड का लाभ होगा।

हम दोनों जानते हैं कि यूरोपीय संघ छोड़ने के बाद से यह ब्रिटेन का सबसे बड़ा और आर्थिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता है और मैं कह सकता हूं कि यह भारत द्वारा किए गए अब तक के सबसे व्यापक समझौतों में से एक है। मैं उन सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने इस समझौते को पूरा करने के लिए इतनी मेहनत की है।”

प्रधानमंत्री मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष ने गुरुवार को बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए, जिससे वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार में लगभग 34 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि होगी।

इस ऐतिहासिक एफटीए के तहत भारत ब्रिटेन के 90 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में कटौती करेगा, जबकि ब्रिटेन 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर शुल्क कम करेगा, जिससे सभी क्षेत्रों में शुल्क सीमा और नियामक प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।

कीर स्टार्मर ने कहा, “जैसा कि मैंने पहले कहा था और जैसा कि हम एक नए वैश्विक युग में प्रवेश कर चुके हैं और इसमें हमें आगे आने की आवश्यकता है, न कि अलग खड़े होने की। हमें गहरी साझेदारियां बनाकर ब्रिटिश लोगों के लिए काम करने की आवश्यकता है और आज इस दृष्टिकोण की पुष्टि हुई है।”

उन्होंने कहा कि भारत के साथ एफटीए एक सशक्त संदेश देता है कि ब्रिटेन व्यापार के लिए खुल रहा है और इससे पहले से ही भारी विश्वास पैदा हो रहा है।

उन्होंने कहा, “ब्रिटेन कई वर्षों से इस तरह के समझौते पर बातचीत कर रहा था, लेकिन यह सरकार ही है, जिसने इसे अंजाम दिया है और इसके साथ ही हम एक बहुत ही शक्तिशाली संदेश दे रहे हैं कि ब्रिटेन व्यापार के लिए खुल रहा है और इससे पहले से ही भारी विश्वास पैदा हो रहा है। आज हम भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच लगभग छह बिलियन पाउंड के निवेश और निर्यात की घोषणा कर रहे हैं, जिससे ब्रिटिश श्रमिकों के लिए 2,200 नौकरियां पैदा होंगी।”

स्टार्मर ने यह भी घोषणा की कि दोनों देश भारत-यूके विजन 2035 रणनीति भी शुरू कर रहे हैं, जिसमें रक्षा, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अधिक निकटता से काम करने का संकल्प लिया गया है।

उन्होंने कहा, “जैसा कि हमने आज सुबह चर्चा की, भारत के साथ हमारे सहयोग की सीमाएं यहीं तक सीमित नहीं हैं। हमारे बीच इतिहास, परिवार और संस्कृति के अनूठे बंधन हैं और हम अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं ताकि ये और भी महत्वाकांक्षी, आधुनिक और दीर्घकालिक हों।

पिछले साल की शरद ऋतु में हमने संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की थी और इसीलिए इस व्यापार समझौते के साथ-साथ मुझे खुशी है कि हम भारत-यूके विजन 2035 रणनीति शुरू करके अपनी साझेदारी को और मजबूत कर रहे हैं। रक्षा, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में और भी निकटता से काम करने का संकल्प ले रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हम प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में पहले से ही किए जा रहे शानदार काम को आगे बढ़ाएंगे, ऐतिहासिक प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल की एक वर्षगांठ मनाएंगे, तथा दोनों देशों के लिए इससे उत्पन्न अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएंगे।”

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