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Sunday, November 1, 2026
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रूसी तेल पर अमेरिकी धमकी के बीच मास्को पहुंचे अजीत डोभाल!

Su-57 फाइटर जेट को लेकर भी बातचीत की संभावना

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रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से भारत को मिली नई टैरिफ धमकी के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मास्को पहुंचे हैं। यह यात्रा पहले से निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा है और इसका मुख्य उद्देश्य भारत और रूस के बीच रक्षा और ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करना है। डोभाल की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गति देने के साथ-साथ भू-राजनीतिक स्थिति पर विचार-विमर्श के लिए भी अहम मानी जा रही है। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने बताया कि बातचीत के एजेंडे में रूसी तेल की भारत को आपूर्ति, रक्षा उपकरणों की खरीद, और मौजूदा वैश्विक तनाव भी शामिल हैं।

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर निशाना बनाते हुए भारतीय उत्पादों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने भारत पर यह भी आरोप लगाया कि वह यूक्रेन संघर्ष पर तटस्थ रहते हुए रूसी तेल खरीदकर उसे वैश्विक बाजार में लाभ के लिए बेच रहा है।

हालांकि भारत ने अमेरिकी आलोचना को खारिज करते हुए सोमवार (4 अगस्त) को एक बयान जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रूस से तेल खरीद वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता के लिए आवश्यक है और इसे पश्चिमी देशों ने पहले समर्थन भी दिया था। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिमी देश अब भी रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं, इसलिए भारत को उपदेश देना अनुचित है।

डोभाल की यात्रा के दौरान S-400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त खरीद, भारत में इसके मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना और रूस के अत्याधुनिक Su-57 फाइटर जेट को लेकर भी बातचीत की संभावना है। रक्षा उद्योग में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग इस बैठक के अहम बिंदु हो सकते हैं। यह दौरा भारत की उस विदेश नीति का हिस्सा है जिसमें वह स्वतंत्र रणनीतिक संतुलन बनाए रखने और राष्ट्रीय हितों के आधार पर साझेदारियों को आगे बढ़ाने पर जोर देता है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इसी महीने 27 और 28 अगस्त को रूस की यात्रा पर जाएंगे। उनकी यात्रा का उद्देश्य रक्षा, ऊर्जा और व्यापार सहयोग को और गहरा करना है। इस दौरान वे रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव से मुलाकात करेंगे। जयशंकर और बोरिसोव भारत-रूस तकनीकी और आर्थिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे।

भारत ने दोहराया है कि रूस के साथ उसके संबंध आपसी समझ और रणनीतिक विश्वास पर आधारित हैं और इन्हें किसी तीसरे देश की मूल्यांकन की कसौटी पर नहीं परखा जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत अपनी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय करता है, न कि बाहरी दबावों के आधार पर।” डोभाल की यह यात्रा इस दिशा में एक और संकेत है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति की राह पर अडिग है और बहुपक्षीय संतुलन को साधने में पूरी तरह सक्रिय है।

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