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Saturday, January 31, 2026
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“उन्होंने विधायी परंपराओं की नींव डालकर लोकतंत्र को आकार दिया”

विट्ठलभाई पटेल की विरासत पर बोले अमित शाह

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स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और देश के पहले निर्वाचित केंद्रीय विधानसभा अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल को याद करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार (24 अगस्त) को कहा कि पटेल ने भारत की विधायी परंपराओं की नींव रखकर लोकतंत्र को मजबूत आधार प्रदान किया। दिल्ली विधानसभा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। यह आयोजन विट्ठलभाई पटेल के स्पीकर बनने के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया।

अमित शाह ने कहा, “आज के ही दिन महान स्वतंत्रता सेनानी विट्ठलभाई पटेल केंद्रीय विधानसभा के स्पीकर बने थे। यह अवसर ऐतिहासिक है। देश के सभी सदनों की लाइब्रेरी में अब तक के महान अध्यक्षों के विचारों को दर्ज करना चाहिए। जिस तरह आज विट्ठलभाई पटेल पर प्रदर्शनी लगाई गई, वैसी प्रदर्शनी सभी विधानसभाओं में होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में विधानसभा की भूमिका अहम रही है और इस सदन से गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय, चितरंजन दास और मदन मोहन मालवीय जैसे महान नेता जुड़े रहे। गुजरात से निकले दोनों भाइयों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा, “सरदार पटेल ने गांधी जी के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी, जबकि विट्ठलभाई पटेल ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की नींव रखी।”

इस मौके पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि दो दिन का यह विशेष सत्र बेहद उपयोगी रहेगा। रिजिजू ने कहा, “हाउस की कार्यवाही को लेकर अलग-अलग विधानसभाओं की अपनी परंपराएं रही हैं। अगर संसद और विधानसभा सही ढंग से नहीं चलेगी तो लोकतंत्र पर सवाल उठेगा। विपक्ष का काम है सरकार की आलोचना करना, लेकिन सदन को चलने से रोकना उचित नहीं है।”

रिजिजू ने यह भी कहा कि आज ऑनलाइन माध्यम से सदन की कार्यवाही देखी जा सकती है, जिससे जनता को पारदर्शिता और जवाबदेही का अनुभव मिलता है। उन्होंने माना कि सभी सदनों का संचालन अलग-अलग तरीके से होता है और उन्हें किसी ‘नंबर’ से आंका नहीं जा सकता।

इस अवसर पर नेताओं ने विट्ठलभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा दी। यह आयोजन न केवल इतिहास को स्मरण कराने वाला रहा, बल्कि भविष्य के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प भी दिलाने वाला साबित हुआ।

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