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नाड़ी शोधन : तनाव और थकान को दूर करें, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से शरीर की नाड़ियां साफ होती हैं, जिससे शरीर दिनभर एक्टिव बना रहता है।

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आज के समय में लोगों की जिंदगी में तनाव, बेचैनी, अनियमित जीवनशैली और मानसिक थकावट आम हो गई है। बच्चे हों या बड़े, हर कोई किसी न किसी रूप में मानसिक दबाव से गुजर रहा है। ऐसे में योग और प्राणायाम शरीर और मन को संतुलन बनाए रखने का आसान तरीका है। प्राणायाम का एक अहम हिस्सा है ‘नाड़ी शोधन प्राणायाम’, जिसे शरीर की ऊर्जा नाड़ियों को साफ करने का अभ्यास कहा जाता है।

शनिवार को आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर नाड़ी शोधन प्राणायाम के बारे में विस्तार से बताया। मंत्रालय ने इसे एक ऐसा साधन बताया है जो शरीर, मन और आत्मा… तीनों को शांत करता है और आपसी संतुलन बनाता है।

इस प्राणायाम को करते समय एक नथुने से सांस ली जाती है और दूसरे से बाहर छोड़ी जाती है। यह अभ्यास बाएं और दाएं मस्तिष्क के बीच संतुलन बनाता है और व्यक्ति को अधिक केंद्रित और शांत बनाता है।

आयुष मंत्रालय ने अपने पोस्ट में लिखा कि नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से शरीर की नाड़ियां साफ होती हैं, जिससे शरीर दिनभर एक्टिव बना रहता है। बच्चों में जहां ये ऊर्जा पढ़ाई और खेल में ध्यान लगाने में मदद करती है, वहीं बड़ों को ये दफ्तर या घर के कामों में बेहतर फोकस करने में मदद देती है।

यह एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाता है। जब हम लगातार तेज सांसों की बजाय शांत और गहरी सांसें लेते हैं, तो हमारा दिमाग ज्यादा ऑक्सीजन पाता है। इससे सोचने और समझने की शक्ति बढ़ती है। जो छात्र पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाते या जो लोग जल्दी भूल जाते हैं, उनके लिए यह प्राणायाम एक प्राकृतिक दवा जैसा है।

आयुष मंत्रालय ने बताया कि यह अभ्यास तनाव और चिंता को कम करने में भी बहुत फायदेमंद है। जब हम धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते हैं, तो हमारे शरीर का नर्वस सिस्टम शांत हो जाता है। दिमाग में चल रही घबराहट या ओवरथिंकिंग रुक जाती है। इससे मन हल्का लगता है और चिंता दूर होने लगती है। नींद न आने की शिकायत वाले लोगों को भी इससे काफी राहत मिलती है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम सोचने और महसूस करने की क्षमता में संतुलन लाता है। जो लोग भावनात्मक रूप से जल्दी परेशान हो जाते हैं या निर्णय लेने में उलझन महसूस करते हैं, उनके लिए यह प्राणायाम काफी मददगार हो सकता है। बाएं मस्तिष्क से हम तर्क करते हैं, जबकि दायां मस्तिष्क भावनाओं से जुड़ा होता है। जब दोनों में संतुलन होता है तो व्यक्ति मानसिक रूप से स्थिर हो जाता है।

मंत्रालय ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अभी शुरुआत कर रहा है तो उसे सांस लेने और छोड़ने की बराबर अवधि से शुरुआत करनी चाहिए, जैसे 4 सेकंड में सांस लेना और 4 सेकंड में छोड़ना। धीरे-धीरे जब अभ्यास में सहजता आने लगे, तो समय बढ़ाया जा सकता है। रोजाना 10-15 मिनट करने से मन शांत और शरीर स्वस्थ रहता है।

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