पाकिस्तान दशकों से यह दावा करता आया है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां स्थानीय लोगों की देन हैं। इसी रणनीति के तहत उसने पहले हिजबुल मुजाहिदीन को एक स्थानीय संगठन के रूप में खड़ा किया और इसके कमजोर पड़ने के बाद लश्कर-ए-तैयबा के लिए द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसी नई प्रॉक्सी लॉन्च की। मकसद साफ था, दुनिया को यह यकीन दिलाना कि कश्मीरी ही भारत से अलगाव चाहते हैं और इसमें पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं है।
हालांकि, भारतीय जांच एजेंसियां बार-बार इस झूठ को उजागर करती रही हैं। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एनआईए ने स्पष्ट कहा था कि हमलावर पाकिस्तान से आए थे और पूरा हमला इस्लामाबाद समर्थित था। अब एक कश्मीरी एनजीओ ‘सेव यूथ सेव फ्यूचर फाउंडेशन’ की रिपोर्ट ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है।
शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि “अनरेवेलिंग द ट्रुथ: ए क्रिटिकल स्टडी ऑफ अनमार्क्ड एंड अनआइडेंटिफाइड ग्रेव्स इन कश्मीर वैली” घाटी में 60% अचिह्नित कब्रें विदेशी आतंकवादियों की हैं, जबकि सिर्फ 30% कब्रें स्थानीय आतंकवादियों की हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि नागरिकों की कब्रें महज 0.2% (सिर्फ 9 कब्रें) पाई गईं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुल 2,493 कब्रें विदेशी आतंकियों की, 1,208 स्थानीय आतंकियों की, 9 नागरिकों की और 70 कब्रें 1947 के कबायली हमलावरों की हैं। यह खुलासा पाकिस्तान की उस दलील को पूरी तरह झूठा साबित करता है कि कश्मीर में बड़े पैमाने पर नागरिकों की हत्याएं हो रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान का उद्देश्य हमेशा से यह रहा है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को कठघरे में खड़ा किया जाए। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान ने दावा किया था कि भारत ने खुद इस्लामाबाद से हमले रोकने की गुहार लगाई थी। इसके अलावा, पाकिस्तान ने सोशल मीडिया और आधिकारिक चैनलों का इस्तेमाल कर झूठ फैलाया ताकि भारतीय नागरिकों में दहशत फैले और वैश्विक समुदाय में भ्रम पैदा हो।
पाकिस्तान ने यहां तक कोशिश की कि भारत में सिखों को भड़काया जाए। उसने झूठा आरोप लगाया कि भारत ने ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमला किया और यहां तक दावा किया कि भारत ने अमृतसर पर मिसाइलें दागी थीं। पाकिस्तान के आईएसपीआर प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने यह बयान दिया था, जिसे भारत ने तुरंत झूठा करार दिया।
भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की रिपोर्टें और एनआईए की हालिया जांच न सिर्फ पाकिस्तान के झूठे नैरेटिव को ध्वस्त करती हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत का पक्ष और मजबूत करती हैं। एनआईए की जांच ने यह भी उजागर किया कि हालिया आतंकी हमले में शामिल तीनों आतंकी पाकिस्तानी मूल के थे और उनकी फंडिंग सीधे पाकिस्तान से हुई थी।
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